Available Bhashyas

Bhashyas

Choose the bhashyas to show on this mantra page.

Rigveda Mandal 6 / Sukta 20 / Mantra 7

75 Sukta
13 Mantra
6/20/7
Devata- इन्द्र: Rishi- भरद्वाजो बार्हस्पत्यः Chhanda- पङ्क्तिः Swara- पञ्चमः
Mantra with Swara
वि पिप्रो॒रहि॑मायस्य दृ॒ळ्हाः पुरो॑ वज्रि॒ञ्छव॑सा॒ न द॑र्दः। सुदा॑म॒न्तद्रेक्णो॑ अप्रमृ॒ष्यमृ॒जिश्व॑ने दा॒त्रं दा॒शुषे॑ दाः ॥७॥

वि । पिप्रोः॑ । अहि॑ऽमायस्य । दृ॒ळ्हाः । पुरः॑ । व॒ज्रि॒न् । शव॑सा । न । द॒र्द॒रिति॑ दर्दः । सुऽदा॑मन् । तत् । रेक्णः॑ । अ॒प्र॒ऽमृ॒ष्यम् । ऋ॒जिश्व॑ने । दा॒त्रम् । दा॒शुषे॑ । दाः॒ ॥

Mantra without Swara
वि पिप्रोरहिमायस्य दृळ्हाः पुरो वज्रिञ्छवसा न दर्दः। सुदामन्तद्रेक्णो अप्रमृष्यमृजिश्वने दात्रं दाशुषे दाः ॥

वि। पिप्रोः। अहिऽमायस्य। दृळ्हाः। पुरः। वज्रिन्। शवसा। न। दर्दरिति दर्दः। सुऽदामन्। तत्। रेक्णः। अप्रऽमृष्यम्। ऋजिश्वने। दात्रम्। दाशुषे। दाः ॥७॥

Ashtak » 4 Adhyay » 6 Varga » 10 Mantra » 2

Available Bhashyas

1 Bhashyas
Meaning
हे (वज्रिन्) शस्त्र और अस्त्रों को धारण करनेवाले (सुदामन्) उत्तम प्रकार से दाता राजन् ! आप (अहिमायस्य) मेघ का ढाँप लेना जैसे वैसे कपटता जिसकी उस (पिप्रोः) व्यापक की (दृळ्हाः) दृढ़ (पुरः) नगरियों को (शवसा) बल से (न) नहीं (वि, दर्दः) विशेष नष्ट कीजिये और जो (अप्रमृष्यम्) नहीं सहने योग्य (दात्रम्) दान को (ऋजिश्वने) सरलता आदि गुणों के बढ़ानेवाले (दाशुषे) दान देने योग्य पुरुष के लिये (दाः) दीजिये (तत्) उस (रेक्णः) धनदान को हम लोगों के लिये भी दीजिये ॥७॥
Essence
राजा को चाहिये कि छल आदि का त्याग कर और अपने नगरों को दृढ़ करके कभी छेदन न करे और सुपात्र के लिये दान दे और कुपात्र का तिरस्कार करे ॥७॥
Subject
फिर राजा क्या करे, इस विषय को कहते हैं ॥