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Rigveda Mandal 6 / Sukta 19 / Mantra 9

75 Sukta
13 Mantra
6/19/9
Devata- इन्द्र: Rishi- भरद्वाजो बार्हस्पत्यः Chhanda- पङ्क्तिः Swara- पञ्चमः
Mantra with Swara
आ ते॒ शुष्मो॑ वृष॒भ ए॑तु प॒श्चादोत्त॒राद॑ध॒रादा पु॒रस्ता॑त्। आ वि॒श्वतो॑ अ॒भि समे॑त्व॒र्वाङिन्द्र॑ द्यु॒म्नं स्व॑र्वद्धेह्य॒स्मे ॥९॥

आ । ते॒ । शुष्मः॑ । वृ॒ष॒भः । ए॒तु॒ । प॒श्चात् । आ । उ॒त्त॒रात् । अ॒ध॒रात् । आ । पु॒रस्ता॑त् । आ । वि॒श्वतः॑ । अ॒भि । सम् । ए॒तु॒ । अ॒र्वाङ् । इन्द्र॑ । द्यु॒म्नम् । स्वः॑ऽवत् । धे॒हि॒ । अ॒स्मे इति॑ ॥

Mantra without Swara
आ ते शुष्मो वृषभ एतु पश्चादोत्तरादधरादा पुरस्तात्। आ विश्वतो अभि समेत्वर्वाङिन्द्र द्युम्नं स्वर्वद्धेह्यस्मे ॥

आ। ते। शुष्मः। वृषभः। एतु। पश्चात्। आ। उत्तरात्। अधरात्। आ। पुरस्तात्। आ। विश्वतः। अभि। सम्। एतु। अर्वाङ्। इन्द्र। द्युम्नम्। स्वःऽवत्। धेहि। अस्मे इति ॥९॥

Ashtak » 4 Adhyay » 6 Varga » 8 Mantra » 4

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1 Bhashyas
Meaning
हे (इन्द्र) अत्यन्त ऐश्वर्य के करनेवाले ! जैसे (अस्मे) हम लोगों के लिये (पश्चात्) पीछे से (स्वर्वत्) बहुत प्रकार सुख विद्यमान जिसमें उस (द्युम्नम्) प्रकाशस्वरूप यश वा धन को (एतु) प्राप्त हूजिये और (उत्तरात्) बाईं ओर से बहुत प्रकार सुख जिसमें उस प्रकाशस्वरूप यश वा धन को (आ) सब ओर से प्राप्त हूजिये और (अधरात्) नीचे से बहुविध सुखवाले प्रकाशस्वरूप यश वा धन को (आ) सब ओर से प्राप्त हूजिये तथा (विश्वतः) सब ओर से प्रकाशस्वरूप यश वा धन के (आ) सब प्रकार से (अभि, एतु) सम्मुख हूजिये और (अर्वाङ्) नीचे से बहुत सुखवाले सम्पूर्ण प्रकाशस्वरूप यश वा धन को (सम्) उत्तम प्रकार प्राप्त हूजिये तथा (पुरस्तात्) आगे से बहुत प्रकार सुख जिसमें उस प्रकाशस्वरूप यश वा धन को अच्छे प्रकार प्राप्त हूजिये, वैसे (ते) आप का (शुष्मः) उत्तम बलयुक्त (वृषभः) बलिष्ठ (आ) सब ओर से प्राप्त होवे और आप हम लोगों के लिये इसको (धेहि) धारण करिये ॥९॥
Essence
हे राजा और प्रजाजनो ! जैसे सब दिशाओं से सम्पूर्ण जनों को सुख और यश प्राप्त होवें, वैसे यत्न का अनुष्ठान करिये ॥९॥
Subject
फिर सम्पूर्ण जनों को क्या करना चाहिये, इस विषय को कहते हैं ॥