Available Bhashyas

Bhashyas

Choose the bhashyas to show on this mantra page.

Rigveda Mandal 6 / Sukta 19 / Mantra 8

75 Sukta
13 Mantra
6/19/8
Devata- इन्द्र: Rishi- भरद्वाजो बार्हस्पत्यः Chhanda- त्रिष्टुप् Swara- धैवतः
Mantra with Swara
आ नो॑ भर॒ वृष॑णं॒ शुष्म॑मिन्द्र धन॒स्पृतं॑ शूशु॒वासं॑ सु॒दक्ष॑म्। येन॒ वंसा॑म॒ पृत॑नासु॒ शत्रू॒न्तवो॒तिभि॑रु॒त जा॒मीँरजा॑मीन् ॥८॥

आ । नः॒ । भ॒र॒ । वृष॑णम् । शुष्म॑म् । इ॒न्द्र॒ । ध॒न॒ऽस्पृत॑म् । शू॒शु॒ऽवांस॑म् । सु॒ऽदक्ष॑म् । येन॑ । वंसा॑म । पृत॑नासु । शत्रू॑न् । तव॑ । ऊ॒तिऽभिः॑ । उ॒त । जा॒मीन् । अजा॑मीन् ॥

Mantra without Swara
आ नो भर वृषणं शुष्ममिन्द्र धनस्पृतं शूशुवासं सुदक्षम्। येन वंसाम पृतनासु शत्रून्तवोतिभिरुत जामीँरजामीन् ॥

आ। नः। भर। वृषणम्। शुष्मम्। इन्द्र। धनऽस्पृतम्। शूशुऽवांसम्। सुऽदक्षम्। येन। वंसाम। पृतनासु। शत्रून्। तव। ऊतिऽभिः। उत। जामीन्। अजामीन् ॥८॥

Ashtak » 4 Adhyay » 6 Varga » 8 Mantra » 3

Available Bhashyas

1 Bhashyas
Meaning
हे (इन्द्र) दुष्टों के बलनाशक ! आप (नः) हम लोगों के लिये (वृषणम्) शत्रुओं के सामर्थ्य को रोकनेवाली (शुष्मम्) सेना और (धनस्पृतम्) धन को पूरण करते जिससे उस (शूशुवांसम्) शुभगुणव्यापिनी (सुदक्षम्) उत्तम बल की चतुराई को (आ) सब ओर से (भर) धारण करिये (येन) जिससे हम लोग (तव) आपके (ऊतिभिः) रक्षण आदिकों से (जामीन्) सम्बन्धी बन्धु आदिकों का (उत) और (अजामीन्) असम्बन्धी दुष्ट (शत्रून्) शत्रुओं का (पृतनासु) मनुष्यों की सेनाओं में (वंसाम) विभाग करें ॥८॥
Essence
राजाओं को चाहिये कि ऐसा प्रयत्न करें जिससे मित्र और शत्रु पृथक्-पृथक् प्रतीत होवें और वैसी ही सेना रखनी चाहिये जिससे शत्रु नष्ट होवें ॥८॥
Subject
फिर उसी विषय को कहते हैं ॥