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Rigveda Mandal 6 / Sukta 19 / Mantra 7

75 Sukta
13 Mantra
6/19/7
Devata- इन्द्र: Rishi- भरद्वाजो बार्हस्पत्यः Chhanda- निचृत्त्रिष्टुप् Swara- धैवतः
Mantra with Swara
यस्ते॒ मदः॑ पृतना॒षाळमृ॑ध्र॒ इन्द्र॒ तं न॒ आ भ॑र शूशु॒वांस॑म्। येन॑ तो॒कस्य॒ तन॑यस्य सा॒तौ मं॑सी॒महि॑ जिगी॒वांस॒स्त्वोताः॑ ॥७॥

यः । ते॒ । मदः॑ । पृ॒त॒ना॒षाट् । अमृ॑ध्रः । इन्द्र॑ । तम् । नः॒ । आ । भ॒र॒ । शू॒शु॒ऽवांस॑म् । येन॑ । तो॒कस्य॑ । तन॑यस्य । सा॒तौ । मं॒सी॒महि॑ । जि॒गी॒वांसः॑ । त्वाऽऊ॑ताः ॥

Mantra without Swara
यस्ते मदः पृतनाषाळमृध्र इन्द्र तं न आ भर शूशुवांसम्। येन तोकस्य तनयस्य सातौ मंसीमहि जिगीवांसस्त्वोताः ॥

यः। ते। मदः। पृतनाषाट्। अमृध्रः। इन्द्र। तम्। नः। आ। भर। शूशुऽवांसम्। येन। तोकस्य। तनयस्य। सातौ। मंसीमहि। जिगीवांसः। त्वाऽऊताः ॥७॥

Ashtak » 4 Adhyay » 6 Varga » 8 Mantra » 2

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1 Bhashyas
Meaning
हे (इन्द्र) राजन् ! (ते) आप का (यः) जो (अमृध्रः) नहीं हिंसा करने और (पृतनाषाट्) सेनाओं को सहनेवाला (मदः) आनन्द है (येन) जिससे (जिगीवांसः) जीतनेवाले (त्वोताः) आप से रक्षित हम लोग (तोकस्य) सन्तान (तनयस्य) सुकुमार के (सातौ) संविभाग में रक्षा और विद्यावान् को (मंसीमहि) जानें और आप (तम्) उस (शूशुवांसम्) श्रेष्ठ गुणों से व्याप्त को (नः) हम लोगों के लिये (आ, भर) सब प्रकार से धारण करिये ॥७॥
Essence
हे प्रजाजनो ! आप लोग राजा के प्रति यह कहो कि हम लोगों के सन्तान जिस प्रकार उत्तम शिक्षित हों, वैसे नियमों को करिये जिससे विजय और आनन्द बढ़े ॥७॥
Subject
फिर उसी विषय को कहते हैं ॥