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Rigveda Mandal 6 / Sukta 18 / Mantra 7

75 Sukta
15 Mantra
6/18/7
Devata- इन्द्र: Rishi- भरद्वाजो बार्हस्पत्यः Chhanda- विराट्त्रिष्टुप् Swara- धैवतः
Mantra with Swara
स म॒ज्मना॒ जनि॑म॒ मानु॑षाणा॒मम॑र्त्येन॒ नाम्नाति॒ प्र स॑र्स्रे। स द्यु॒म्नेन॒ स शव॑सो॒त रा॒या स वी॒र्ये॑ण॒ नृत॑मः॒ समो॑काः ॥७॥

सः । म॒ज्मना॑ । जनि॑म । मानु॑षाणाम् । अम॑र्त्येन । नाम्ना॑ । अति॑ । प्र । स॒र्स्रे॒ । सः । द्यु॒म्नेन॑ । सः । शव॑सा । उ॒त । रा॒या । सः । वी॒र्ये॑ण । नृऽत॑मः । सम्ऽओ॑काः ॥

Mantra without Swara
स मज्मना जनिम मानुषाणाममर्त्येन नाम्नाति प्र सर्स्रे। स द्युम्नेन स शवसोत राया स वीर्येण नृतमः समोकाः ॥

सः। मज्मना। जनिम। मानुषाणाम्। अमर्त्येन। नाम्ना। अति। प्र। सर्स्रे। सः। द्युम्नेन। सः। शवसा। उत। राया। सः। वीर्येण। नृऽतमः। सम्ऽओकाः ॥७॥

Ashtak » 4 Adhyay » 6 Varga » 5 Mantra » 2

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1 Bhashyas
Meaning
हे राजन् ! जैसे यह सेवक (मज्मना) बल से (सः) वह (द्युम्नेन) धन वा यश से (सः) वह (शवसा) विशेष बल से (सः) वह (राया) धन से और (उत) भी (सः) वह (वीर्य्येण) पराक्रम से (मानुषाणाम्) मनुष्यों के (अमर्त्येन) मरणधर्म्म से रहित कारण से और (नाम्ना) संज्ञा से (जनिम) जन्म अर्थात् प्रकट होने को (अति, प्र, सर्स्रे) अत्यन्त प्राप्त होता है वह (समोकाः) एक स्थानवाला (नृतमः) मनुष्यों के मध्य में अतिशय उत्तम होवे, वैसे आप करिये ॥७॥
Essence
राजा को चाहिये कि जैसे प्रजा और राजा के जन प्रसिद्धि, बल, धन, यश और पराक्रम को प्राप्त होवें, वैसे प्रयत्न करें ॥७॥
Subject
फिर राजा को क्यो करना चाहिये, इस विषय को कहते हैं ॥