Available Bhashyas

Bhashyas

Choose the bhashyas to show on this mantra page.

Rigveda Mandal 6 / Sukta 18 / Mantra 5

75 Sukta
15 Mantra
6/18/5
Devata- इन्द्र: Rishi- भरद्वाजो बार्हस्पत्यः Chhanda- स्वराट्पङ्क्ति Swara- पञ्चमः
Mantra with Swara
तन्नः॑ प्र॒त्नं स॒ख्यम॑स्तु यु॒ष्मे इ॒त्था वद॑द्भिर्व॒लमङ्गि॑रोभिः। हन्न॑च्युतच्युद्दस्मे॒षय॑न्तमृ॒णोः पुरो॒ वि दुरो॑ अस्य॒ विश्वाः॑ ॥५॥

तत् । नः॒ । प्र॒त्नम् । स॒ख्यम् । अ॒स्तु॒ । यु॒ष्मे इति॑ । इ॒त्था । वद॑त्ऽभिः । व॒लम् । अङ्गि॑रःऽभिः । हन् । अ॒च्यु॒त॒ऽच्यु॒त् । द॒स्म॒ । इ॒षय॑न्तम् । ऋ॒णोः । पुरः॑ । वि । दुरः॑ । अ॒स्य॒ । विश्वाः॑ ॥

Mantra without Swara
तन्नः प्रत्नं सख्यमस्तु युष्मे इत्था वदद्भिर्वलमङ्गिरोभिः। हन्नच्युतच्युद्दस्मेषयन्तमृणोः पुरो वि दुरो अस्य विश्वाः ॥

तत्। नः। प्रत्नम्। सख्यम्। अस्तु। युष्मे इति। इत्था। वदत्ऽभिः। वलम्। अङ्गिरःऽभिः। हन्। अच्युतऽच्युत्। दस्म। इषयन्तम्। ऋणोः। पुरः। वि। दुरः। अस्य। विश्वाः ॥५॥

Ashtak » 4 Adhyay » 6 Varga » 4 Mantra » 5

Bhashya

More bhashyas
Meaning
हे न्यायकारी राजा आदि जनो ! आप लोगों के साथ (नः) हम लोगों की जैसे (तत्) वह (प्रत्नम्) प्राचीन (सख्यम्) मित्रता (अस्तु) हो (इत्था) इससे जैसे (युष्मे) आप लोगों के (वदद्भिः) कहते हुओं के साथ हम लोगों की मित्रता हो और जैसे (अङ्गिरोभिः) पवनों के साथ (अच्युतच्युत्) नहीं चञ्चल अर्थात् स्थिर को चञ्चल करनेवाला सूर्य्य (वलम्) मेघ का (हन्) नाश करता है, वैसे हे (दस्म) दुःख के नाश करनेवाले (इषयन्तम्) प्राप्त हुए वा जाते हुए को आप (ऋणोः) सिद्ध करिये और जैसे (अस्य) इस जगत् के (दुरः) द्वारों को सूर्य्य प्रकाशित करता है, वैसे आप (विश्वाः) सम्पूर्ण (पुरः) नगरियों को (वि) विशेष करके सिद्ध करिये ॥५॥
Essence
इस मन्त्र में वाचकलुप्तोपमालङ्कार है। मनुष्यों को चाहिये कि यथाशक्ति उत्तमों के साथ मित्रता ही करें, वह कभी नष्ट न होवे, ऐसा प्रयत्न करें और जैसे सूर्य्य सब को प्रकाशित करता है, वैसे राजा न्याय से सम्पूर्ण राज्य को प्रकाशित करे ॥५॥
Subject
फिर मनुष्यों को परस्पर कैसा वर्त्ताव करना चाहिये, इस विषय को कहते हैं ॥

We are thankful to https://vedicscriptures.in for providing us a substantial amount of data for this section of the Vedas.