Available Bhashyas

Bhashyas

Choose the bhashyas to show on this mantra page.

Rigveda Mandal 6 / Sukta 18 / Mantra 2

75 Sukta
15 Mantra
6/18/2
Devata- इन्द्र: Rishi- भरद्वाजो बार्हस्पत्यः Chhanda- त्रिष्टुप् Swara- धैवतः
Mantra with Swara
स यु॒ध्मः सत्वा॑ खज॒कृत्स॒मद्वा॑ तुविम्र॒क्षो न॑दनु॒माँ ऋ॑जी॒षी। बृ॒हद्रे॑णु॒श्च्यव॑नो॒ मानु॑षीणा॒मेकः॑ कृष्टी॒नाम॑भवत्स॒हावा॑ ॥२॥

सः । यु॒ध्मः । सत्वा॑ । ख॒ज॒ऽकृत् । स॒मत्ऽवा॑ । तु॒वि॒ऽम्र॒क्षः । न॒द॒नु॒ऽमान् । ऋ॒जी॒षी । बृ॒हत्ऽरे॑णुः । च्यव॑नः॒ । मानु॑षीणाम् । एकः॑ । कृ॒ष्टी॒नाम् । अ॒भ॒व॒त् । स॒हऽवा॑ ॥

Mantra without Swara
स युध्मः सत्वा खजकृत्समद्वा तुविम्रक्षो नदनुमाँ ऋजीषी। बृहद्रेणुश्च्यवनो मानुषीणामेकः कृष्टीनामभवत्सहावा ॥

सः। युध्मः। सत्वा। खजऽकृत्। समत्ऽवा। तुविऽम्रक्षः। नदनुऽमान्। ऋजीषी। बृहत्ऽरेणुः। च्यवनः। मानुषीणाम्। एकः। कृष्टीनाम्। अभवत्। सहऽवा ॥२॥

Ashtak » 4 Adhyay » 6 Varga » 4 Mantra » 2

Available Bhashyas

1 Bhashyas
Meaning
हे राजन् ! जो (युध्मः) युद्ध करनेवाला (सत्वा) बलवान् (समद्वा) अच्छे प्रकार स्वादु भोजन करनेवाला (तुविम्रक्षः) बहुत स्नेहयुक्त (नदनुमान्) बहुत शब्द विद्यमान जिसमें ऐसा और (ऋजीषी) सरल चलनेवाला (बृहद्रेणुः) बड़ी धूलि जिसमें वह (च्यवनः) जानेवाला (मानुषीणाम्) मनुष्यसम्बन्धिनी सेनाओं (कृष्टीनाम्) मनुष्यों के मध्य में (एकः) सहायरहित (सहावा) सहनशील (खजकृत्) संग्राम करनेवाला वीर (अभवत्) होवे (सः) वही आप से राज्य की रक्षा के निमित्त नियुक्त करने योग्य है ॥२॥
Essence
राजा को चाहिये कि राजकर्म्मचारी को उत्तम प्रकार परीक्षा करके राज्य व्यवहार में नियुक्त करे, जिससे प्रजा के सुख की वृद्धि हो ॥२॥
Subject
फिर उसी विषय को कहते हैं ॥