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Rigveda Mandal 6 / Sukta 16 / Mantra 9

75 Sukta
48 Mantra
6/16/9
Devata- अग्निः Rishi- भरद्वाजो बार्हस्पत्यः Chhanda- निचृद्गायत्री Swara- षड्जः
Mantra with Swara
त्वं होता॒ मनु॑र्हितो॒ वह्नि॑रा॒सा वि॒दुष्ट॑रः। अग्ने॒ यक्षि॑ दि॒वो विशः॑ ॥९॥

त्वम् । होता॑ । मनुः॑ऽहितः । वह्निः॑ । आ॒सा । वि॒दुःऽत॑रः । अग्ने॑ । यक्षि॑ । दि॒वः । विशः॑ ॥

Mantra without Swara
त्वं होता मनुर्हितो वह्निरासा विदुष्टरः। अग्ने यक्षि दिवो विशः ॥

त्वम्। होता। मनुःऽहितः। वह्निः। आसा। विदुःऽतरः। अग्ने। यक्षि। दिवः। विशः ॥९॥

Ashtak » 4 Adhyay » 5 Varga » 22 Mantra » 4

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1 Bhashyas
Meaning
हे (अग्ने) विद्वन् ! राजन् (वह्निः) प्राप्त करनेवाला अग्नि जैसे वैसे (होता) दाता (मनुर्हितः) मनुष्यों के हितकारी (विदुष्टरः) अत्यन्त विज्ञानवाले (त्वम्) आप (आसा) मुख से (दिवः) कामना करती हुई (विशः) प्रजाओं को (यक्षि) सुखयुक्त करिये ॥९॥
Essence
इस मन्त्र में वाचकलुप्तोपमालङ्कार है। हे प्रजाजनो ! जैसे राजा आप लोगों की कामना करता और सुख देने की इच्छा करता है, वैसे आप लोग भी उस राजा की कामना करके उसके लिये निरन्तर सुख दीजिये ॥९॥
Subject
फिर राजा प्रजाओं में कैसे वर्त्ताव करे, इस विषय को कहते हैं ॥