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Rigveda Mandal 6 / Sukta 16 / Mantra 44

75 Sukta
48 Mantra
6/16/44
Devata- अग्निः Rishi- भरद्वाजो बार्हस्पत्यः Chhanda- साम्नीत्रिष्टुप् Swara- धैवतः
Mantra with Swara
अच्छा॑ नो या॒ह्या व॑हा॒भि प्रयां॑सि वी॒तये॑। आ दे॒वान्त्सोम॑पीतये ॥४४॥

अच्छ॑ । नः॒ । या॒हि॒ । आ । व॒ह॒ । अ॒भि । प्रयां॑सि । वी॒तये॑ । आ । दे॒वान् । सोम॑ऽपीतये ॥

Mantra without Swara
अच्छा नो याह्या वहाभि प्रयांसि वीतये। आ देवान्त्सोमपीतये ॥

अच्छ। नः। याहि। आ। वह। अभि। प्रयांसि। वीतये। आ। देवान्। सोमऽपीतये ॥४४॥

Ashtak » 4 Adhyay » 5 Varga » 29 Mantra » 4

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1 Bhashyas
Meaning
हे विद्वन् ! आप (नः) हम लोगों को (अच्छा) उत्तम प्रकार (सोमपीतये) सोमलतारूप ओषधि के रस के पान के लिये (आ, याहि) सब ओर से प्राप्त होओ और (प्रयांसि) अत्यन्त प्रिय वस्तुओं को (अभि) चारों ओर से (आ) सब प्रकार (वह) प्राप्त होओ और (वीतये) ज्ञान के लिये (देवान्) विद्वानों को सब ओर से प्राप्त होओ ॥४४॥
Essence
मनुष्यों को चाहिये कि सत्कार के लिये विद्वानों का आह्वान करें ॥४४॥
Subject
मनुष्यों को किसका सत्कार करना चाहिये, इस विषय को कहते हैं ॥