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Rigveda Mandal 6 / Sukta 16 / Mantra 41

75 Sukta
48 Mantra
6/16/41
Devata- अग्निः Rishi- भरद्वाजो बार्हस्पत्यः Chhanda- गायत्री Swara- षड्जः
Mantra with Swara
प्र दे॒वं दे॒ववी॑तये॒ भर॑ता वसु॒वित्त॑मम्। आ स्वे योनौ॒ नि षी॑दतु ॥४१॥

प्र । दे॒वम् । दे॒वऽवी॑तये । भर॑त । व॒सु॒वित्ऽत॑मम् । आ । स्वे । योनौ॑ । नि । सी॒द॒तु॒ ॥

Mantra without Swara
प्र देवं देववीतये भरता वसुवित्तमम्। आ स्वे योनौ नि षीदतु ॥

प्र। देवम्। देवऽवीतये। भरत। वसुवित्ऽतमम्। आ। स्वे। योनौ। नि। सीदतु ॥४१॥

Ashtak » 4 Adhyay » 5 Varga » 29 Mantra » 1

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1 Bhashyas
Meaning
हे विद्वान् जनो ! आप लोग (देववीतये) श्रेष्ठ गुणों की प्राप्ति के लिये (वसुवित्तमम्) अतिशय धन को जानने और (देवम्) देनेवाले को (स्वे) अपने (योनौ) गृह में (प्र, आ, भरता) उत्तमता से अच्छे प्रकार धारण करिये वा हरिये, जिससे मनुष्य सुख से (नि, षीदतु) निरन्तर स्थिर होवे ॥४१॥
Essence
हे मनुष्यो ! आप श्रेष्ठ गुणों की प्राप्ति के लिये अग्नि आदि पदार्थों को जानिये ॥४१॥
Subject
फिर मनुष्यों को क्या प्राप्त करने योग्य है, इस विषय को कहते हैं ॥