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Rigveda Mandal 6 / Sukta 16 / Mantra 40

75 Sukta
48 Mantra
6/16/40
Devata- अग्निः Rishi- भरद्वाजो बार्हस्पत्यः Chhanda- निचृद्गायत्री Swara- षड्जः
Mantra with Swara
आ यं हस्ते॒ न खा॒दिनं॒ शिशुं॑ जा॒तं न बिभ्र॑ति। वि॒शाम॒ग्निं स्व॑ध्व॒रम् ॥४०॥

आ । यम् । हस्ते॑ । न । खा॒दिन॑म् । शिशु॑म् । जा॒तम् । न । बिभ्र॑ति । वि॒शाम् । अ॒ग्निम् । सु॒ऽअ॒ध्व॒रम् ॥

Mantra without Swara
आ यं हस्ते न खादिनं शिशुं जातं न बिभ्रति। विशामग्निं स्वध्वरम् ॥

आ। यम्। हस्ते। न। खादिनम्। शिशुम्। जातम्। न। बिभ्रति। विशाम्। अग्निम्। सुऽअध्वरम् ॥४०॥

Ashtak » 4 Adhyay » 5 Varga » 28 Mantra » 5

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1 Bhashyas
Meaning
जो (यम्) जिसको (हस्ते) हाथ में (खादिनम्) भक्षण करनेवाले के (न) समान और (जातम्) उत्पन्न हुए (शिशुम्) बालक के (न) समान (विशाम्) मनुष्यादि प्रजाओं के (स्वध्वरम्) सुन्दर यज्ञ जिससे हों उस (अग्निम्) प्रकाशमान अग्नि को (आ, बिभ्रति) सब ओर से धारण करते हैं, वे उससे कृतकृत्य होते हैं ॥४०॥
Essence
इस मन्त्र में उपमालङ्कार है। हे मनुष्यो ! जो हाथ में आँवले को जैसे वैसे, गोदी में लड़के को जैसे वैसे अग्निविद्या को जानते हैं, वे प्रजा के स्वामी होते हैं ॥४०॥
Subject
फिर उसी विषय को कहते हैं ॥