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Rigveda Mandal 6 / Sukta 16 / Mantra 35

75 Sukta
48 Mantra
6/16/35
Devata- अग्निः Rishi- भरद्वाजो बार्हस्पत्यः Chhanda- गायत्री Swara- षड्जः
Mantra with Swara
गर्भे॑ मा॒तुः पि॒तुष्पि॒ता वि॑दिद्युता॒नो अ॒क्षरे॑। सीद॑न्नृ॒तस्य॒ योनि॒मा ॥३५॥

गर्भे॑ । मा॒तुः । पि॒तुः । पि॒ता । वि॒ऽदि॒द्यु॒ता॒नः । अ॒क्षरे॑ । सीद॑न् । ऋ॒तस्य॑ । योनि॑म् । आ ॥

Mantra without Swara
गर्भे मातुः पितुष्पिता विदिद्युतानो अक्षरे। सीदन्नृतस्य योनिमा ॥

गर्भे। मातुः। पितुः। पिता। विऽदिद्युतानः। अक्षरे। सीदन्। ऋतस्य। योनिम्। आ ॥३५॥

Ashtak » 4 Adhyay » 5 Varga » 27 Mantra » 5

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Meaning
हे विद्वान् जनो ! जो (अक्षरे) नहीं नाश होनेवाले अपने रूप, कारण वा जीव में (ऋतस्य) सत्य के (योनिम्) गृह को (आ) सब ओर से (सीदन्) प्राप्त होता हुआ (मातुः) माता का जैसै, वैसे भूमि का और (पितुः) पिता का जैसै सूर्य्य का (पिता) पालक और (गर्भे) गर्भ में (विदिद्युतानः) विशेष करके प्रकाशमान है, उसको सम्पूर्ण संसार का जनक जानो ॥३५॥
Essence
हे मनुष्यो ! जो उत्पन्न करने वालों का उत्पादक, प्रकाशकों का प्रकाशक है, उसकी सब लोग उपासना करें ॥३५॥
Subject
फिर ईश्वर कैसा है, इस विषय को कहते हैं ॥