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Rigveda Mandal 6 / Sukta 16 / Mantra 30

75 Sukta
48 Mantra
6/16/30
Devata- अग्निः Rishi- भरद्वाजो बार्हस्पत्यः Chhanda- विराड्गायत्री Swara- षड्जः
Mantra with Swara
त्वं नः॑ पा॒ह्यंह॑सो॒ जात॑वेदो अघाय॒तः। रक्षा॑ णो ब्रह्मणस्कवे ॥३०॥

त्वम् । नः॒ । पा॒हि॒ । अंह॑सः । जात॑ऽवेदः । अ॒घ॒ऽय॒तः । रक्ष॑ । नः॒ । ब्र॒ह्म॒णः॒ । क॒वे॒ ॥

Mantra without Swara
त्वं नः पाह्यंहसो जातवेदो अघायतः। रक्षा णो ब्रह्मणस्कवे ॥

त्वम्। नः। पाहि। अंहसः। जातऽवेदः। अघऽयतः। रक्ष। नः। ब्रह्मणः। कवे ॥३०॥

Ashtak » 4 Adhyay » 5 Varga » 26 Mantra » 5

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1 Bhashyas
Meaning
हे (जातवेदः) विद्या से युक्त (ब्रह्मणः) वेद के (कवे) कहनेवाले ! (त्वम्) आप (नः) हम लोगों की (अंहसः) अधर्माचरण से (पाहि) रक्षा कीजिये और (नः) हम लोगों की (अघायतः) अपने पाप करते हुए से (रक्षा) रक्षा कीजिये ॥३०॥
Essence
हे राजन् वा विद्वन् ! आप दोनों हम लोगों का अधर्म्माचरण और अधर्म्म का आचरण करते हुए से अलग करके सुख को बढ़ाइये ॥३०॥
Subject
फिर राजा और विद्वान् क्या करें, इस विषय को कहते हैं ॥