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Rigveda Mandal 6 / Sukta 16 / Mantra 3

75 Sukta
48 Mantra
6/16/3
Devata- अग्निः Rishi- भरद्वाजो बार्हस्पत्यः Chhanda- निचृद्गायत्री Swara- षड्जः
Mantra with Swara
वेत्था॒ हि वे॑धो॒ अध्व॑नः प॒थश्च॑ दे॒वाञ्ज॑सा। अग्ने॑ य॒ज्ञेषु॑ सुक्रतो ॥३॥

वेत्थ॑ । हि । वे॒धः॒ । अध्व॑नः । प॒थः । चे॒ । दे॒व॒ । अञ्ज॑सा । अग्ने॑ । य॒ज्ञेषु॑ । सु॒क्र॒तो॒ इति॑ सुऽक्रतो ॥

Mantra without Swara
वेत्था हि वेधो अध्वनः पथश्च देवाञ्जसा। अग्ने यज्ञेषु सुक्रतो ॥

वेत्थ। हि। वेधः। अध्वनः। पथः। च। देव। अञ्जसा। अग्ने। यज्ञेषु। सुक्रतो इति सुऽक्रतो ॥३॥

Ashtak » 4 Adhyay » 5 Varga » 21 Mantra » 3

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Meaning
हे (सुक्रतो) उत्तम ज्ञान वा उत्तम कर्म्मयुक्त (देव) विज्ञान के देनेवाले (वेधः) मेधावी (अग्ने) प्रकाशात्मा ! (हि) जिससे आप (यज्ञेषु) विद्या और धर्म के प्रचारनामक व्यवहारों में (अञ्जसा) स्वतन्त्रतायुक्त वेगवालेपन से (अध्वनः) मार्गों को और (पथः) मार्गों को (च) भी (वेत्था) जानते हो, इससे हम लोगों को जनाइये ॥३॥
Essence
इस संसार में जो मनुष्य धर्म्म, अर्थ, काम और मोक्ष के मार्गों को जानें, वे ही अन्यों को भी उपदेश देवें, न कि इतर अज्ञ जन ॥३॥
Subject
कौन उपदेश करने योग्य होवे, इस विषय को कहते हैं ॥