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Rigveda Mandal 6 / Sukta 16 / Mantra 29

75 Sukta
48 Mantra
6/16/29
Devata- अग्निः Rishi- भरद्वाजो बार्हस्पत्यः Chhanda- गायत्री Swara- षड्जः
Mantra with Swara
सु॒वीरं॑ र॒यिमा भ॑र॒ जात॑वेदो॒ विच॑र्षणे। ज॒हि रक्षां॑सि सुक्रतो ॥२९॥

सु॒ऽवीर॑म् । र॒यिम् । आ । भ॒र॒ । जात॑ऽवेदः॑ । विऽच॑र्षणे । ज॒हि । रक्षां॑सि । सु॒ऽक्र॒तो॒ इति॑ सुऽक्रतो ॥

Mantra without Swara
सुवीरं रयिमा भर जातवेदो विचर्षणे। जहि रक्षांसि सुक्रतो ॥

सुऽवीरम्। रयिम्। आ। भर। जातऽवेदः। विऽचर्षणे। जहि। रक्षांसि। सुऽक्रतो इति सुऽक्रतो ॥२९॥

Ashtak » 4 Adhyay » 5 Varga » 26 Mantra » 4

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Meaning
हे (जातवेदः) उत्पन्न हुआ प्रज्ञानबल जिनके उन (विचर्षणे) तेजस्वी तथा (सुक्रतो) उत्तम बुद्धि और कर्म्म से युक्त राजन् ! आप (सुवीरम्) सुन्दर वीर जिससे होते हैं उस (रयिम्) धन को (आ, भर) सब ओर से धारण करिये और (रक्षांसि) दुष्टाचारियों को (जहि) नष्ट करिये ॥२९॥
Essence
राजा को चाहिये कि सदा ही धन आदि से धार्मिक विद्वान् और क्षत्रिय कुल में हुए वीरों की उत्तम प्रकार रक्षा करे और दुष्टों का सदा तिरस्कार करे ॥२९॥
Subject
फिर राजा को क्या करना चाहिये, इस विषय को कहते हैं ॥