Available Bhashyas

Bhashyas

Choose the bhashyas to show on this mantra page.

Rigveda Mandal 6 / Sukta 16 / Mantra 24

75 Sukta
48 Mantra
6/16/24
Devata- अग्निः Rishi- भरद्वाजो बार्हस्पत्यः Chhanda- निचृद्गायत्री Swara- षड्जः
Mantra with Swara
ता राजा॑ना॒ शुचि॑व्रतादि॒त्यान्मारु॑तं ग॒णम्। वसो॒ यक्षी॒ह रोद॑सी ॥२४॥

ता । राजा॑ना । शुचि॑ऽव्रता । आ॒दि॒त्यान् । मारु॑तम् । ग॒णम् । वसो॒ इति॑ । यक्षि॑ । इ॒ह । रोद॑सी॒ इति॑ ॥

Mantra without Swara
ता राजाना शुचिव्रतादित्यान्मारुतं गणम्। वसो यक्षीह रोदसी ॥

ता। राजाना। शुचिऽव्रता। आदित्यान्। मारुतम्। गणम्। वसो इति। यक्षि। इह। रोदसी इति ॥२४॥

Ashtak » 4 Adhyay » 5 Varga » 25 Mantra » 4

Available Bhashyas

1 Bhashyas
Meaning
हे (वसो) श्रेष्ठ गुणों के वसानेवाले ! आप (इह) इस संसार में (ता) उन दोनों मित्र के सदृश वर्त्तमान (शुचिव्रता) पवित्र कर्म्मवाले (राजाना) प्रकाशमान हुए तथा (आदित्यान्) बारह महीनों और (मारुतम्) मनुष्य सम्बन्धी इस (गणम्) समहू को (रोदसी) अन्तरिक्ष और पृथिवी को (यक्षि) उत्तम प्रकार प्राप्त कराइये ॥२४॥
Essence
जो मनुष्य पढ़ाने और पढ़नेवाले आदिकों की सेवा करके पदार्थविद्या को ग्रहण करते हैं, वे सुखी होते हैं ॥२४॥
Subject
फिर मनुष्यों को क्या करना चाहिये, इस विषय को कहते हैं ॥