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Rigveda Mandal 6 / Sukta 16 / Mantra 23

75 Sukta
48 Mantra
6/16/23
Devata- अग्निः Rishi- भरद्वाजो बार्हस्पत्यः Chhanda- गायत्री Swara- षड्जः
Mantra with Swara
हि यो मानु॑षा यु॒गा सीद॒द्धोता॑ क॒विक्र॑तुः। दू॒तश्च॑ हव्य॒वाह॑नः ॥२३॥

सः । हि । यः । मानु॑षा । यु॒गा । सीद॑त् । होता॑ । क॒विऽक्र॑तुः । दू॒तः । च॒ । ह॒व्य॒ऽवाह॑नः ॥

Mantra without Swara
हि यो मानुषा युगा सीदद्धोता कविक्रतुः। दूतश्च हव्यवाहनः ॥

सः। हि। यः। मानुषा। युगा। सीदत्। होता। कविऽक्रतुः। दूतः। च। हव्यऽवाहनः ॥२३॥

Ashtak » 4 Adhyay » 5 Varga » 25 Mantra » 3

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Meaning
(यः) जो (हव्यवाहनः) हनव किये गये द्रव्यों को प्राप्त कराने पहुँचानेवाला और (दूतः) दूतवत् वर्त्तमान (च) भी अग्नि (मानुषा) मनुष्य-सम्बन्धी (युगा) वर्ष वा वर्षसमुदायों को (सीदत्) प्राप्त होता है (सः) (हि) वही (होता) दाता (कविक्रतुः) बड़ा विद्वान् जैसे वैसे कार्य का साधक होता है ॥२३॥
Essence
इस मन्त्र में वाचकलुप्तोपमालङ्कार है। जो अग्नि धार्मिक और विद्वानों के कार्य्यों का करनेवाला होता है, उसको विद्वान् जन कार्य्यों की सिद्धि के लिये सम्प्रयुक्त करें ॥२३॥
Subject
फिर वह अग्नि कैसा है, इस विषय को कहते हैं ॥

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