Available Bhashyas

Bhashyas

Choose the bhashyas to show on this mantra page.

Rigveda Mandal 6 / Sukta 16 / Mantra 18

75 Sukta
48 Mantra
6/16/18
Devata- अग्निः Rishi- भरद्वाजो बार्हस्पत्यः Chhanda- निचृद्गायत्री Swara- षड्जः
Mantra with Swara
न॒हि ते॑ पू॒र्तम॑क्षि॒पद्भुव॑न्नेमानां वसो। अथा॒ दुवो॑ वनवसे ॥१८॥

न॒हि । ते॒ । पू॒रम् । अ॒क्षि॒ऽपत् । भुव॑त् । ने॒मा॒ना॒म् । व॒सो॒ इति॑ । अथ॑ । दुवः॑ । व॒न॒व॒से॒ ॥

Mantra without Swara
नहि ते पूर्तमक्षिपद्भुवन्नेमानां वसो। अथा दुवो वनवसे ॥

नहि। ते। पूर्त्तम्। अक्षिऽपत्। भुवत्। नेमानाम्। वसो इति। अथ। दुवः। वनवसे ॥१८॥

Ashtak » 4 Adhyay » 5 Varga » 24 Mantra » 3

Available Bhashyas

1 Bhashyas
Meaning
हे (वसो) वसानेवाले (ते) आपके (नेमानाम्) अन्नों के (पूर्त्तम्) पूर्ण करनेवाले को मैं भी (नहि) नहीं (अक्षिपत्) फेंकता और नहीं (भुवत्) होवे, इससे (अथा) इसके अनन्तर (दुवः) सेवा को (वनवसे) स्वीकार करिये ॥१८॥
Essence
जो मनुष्य सत्य आचरण को करते हैं, उनकी कामना की पूर्ति कभी भी नहीं नष्ट की जाती है ॥१८॥
Subject
मनुष्यों की किस प्रकार से इच्छा सिद्ध होती है, इस विषय को कहते हैं ॥