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Rigveda Mandal 6 / Sukta 16 / Mantra 16

75 Sukta
48 Mantra
6/16/16
Devata- अग्निः Rishi- भरद्वाजो बार्हस्पत्यः Chhanda- साम्नीत्रिष्टुप् Swara- धैवतः
Mantra with Swara
एह्यू॒ षु ब्रवा॑णि॒ तेऽग्न॑ इ॒त्थेत॑रा॒ गिरः॑। ए॒भिर्व॑र्धास॒ इन्दु॑भिः ॥१६॥

आ । इ॒हि॒ । ऊँ॒ इति॑ । सु । ब्रवा॑णि । ते॒ । अग्ने॑ । इ॒त्था । इत॑राः । गिरः॑ । ए॒भिः । व॒र्धा॒से॒ । इन्दु॑ऽभिः ॥

Mantra without Swara
एह्यू षु ब्रवाणि तेऽग्न इत्थेतरा गिरः। एभिर्वर्धास इन्दुभिः ॥

आ। इहि। ऊँ इति। सु। ब्रवाणि। ते। अग्ने। इत्था। इतराः। गिरः। एभिः। वर्धासे। इन्दुऽभिः ॥१६॥

Ashtak » 4 Adhyay » 5 Varga » 24 Mantra » 1

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1 Bhashyas
Meaning
हे (अग्ने) विद्वन् जन ! (एभिः) इन (इन्दुभिः) सोमलताओं वा चन्द्रकिरणों से आप (वर्धासे) वृद्धि को प्राप्त होते हो उनसे (आ, इहि) प्राप्त हूजिये (इत्था) इस प्रकार से (इतराः) पीछे की (ते) आपकी (गिरः) वाणियों को (सु, ब्रवाणि) उत्तम प्रकार उपदेश करूँ और आप (उ) तर्क वितर्क से सुनें ॥१६॥
Essence
जो मनुष्य, हम लोग विद्याओं को पढ़कर सब को उपदेश देवें, इस प्रकार इच्छा करते हैं, वे हम लोगों को प्राप्त होवें ॥१६॥
Subject
फिर मनुष्यों को क्या करना चाहिये, इस विषय को कहते हैं ॥