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Rigveda Mandal 6 / Sukta 15 / Mantra 7

75 Sukta
19 Mantra
6/15/7
Devata- अग्निः Rishi- भरद्वाजो बार्हस्पत्यः Chhanda- जगती Swara- निषादः
Mantra with Swara
समि॑द्धम॒ग्निं स॒मिधा॑ गि॒रा गृ॑णे॒ शुचिं॑ पाव॒कं पु॒रो अ॑ध्व॒रे ध्रु॒वम्। विप्रं॒ होता॑रं पुरु॒वार॑म॒द्रुहं॑ क॒विं सु॒म्नैरी॑महे जा॒तवे॑दसम् ॥७॥

सम्ऽइ॑द्धम् । अ॒ग्निम् । स॒म्ऽइधा॑ । गि॒रा । गृ॒णे॒ । शुचि॑म् । पा॒व॒कम् । पु॒रः । अ॒ध्व॒रे । ध्रु॒वम् । विप्र॑म् । होता॑रम् । पु॒रु॒ऽवार॑म् । अ॒द्रुह॑म् । क॒विम् । सु॒म्नैः । ई॒म॒हे॒ । जा॒तऽवे॑दसम् ॥

Mantra without Swara
समिद्धमग्निं समिधा गिरा गृणे शुचिं पावकं पुरो अध्वरे ध्रुवम्। विप्रं होतारं पुरुवारमद्रुहं कविं सुम्नैरीमहे जातवेदसम् ॥

सम्ऽइद्धम्। अग्निम्। सम्ऽइधा। गिरा। गृणे। शुचिम्। पावकम्। पुरः। अध्वरे। ध्रुवम्। विप्रम्। होतारम्। पुरुऽवारम्। अद्रुहम्। कविम्। सुम्नैः। ईमहे। जातऽवेदसम् ॥७॥

Ashtak » 4 Adhyay » 5 Varga » 18 Mantra » 2

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Meaning
हे मनुष्यो ! (समिधा) इन्धन के समान पदार्थ से (समिद्धम्) प्रकाशित हुए (अग्निम्) अग्नि को जैसे वैसे वर्त्तमान को (अध्वरे) अहिंसारूप यज्ञ में (ध्रुवम्) बहुत विद्वानों से सत्कार किये गये (अद्रुहम्) द्रोह से रहित (जातवेदसम्) प्रकट हुई विद्या जिसकी ऐसे (विप्रम्) विद्या और विनय से बुद्धिमान् को (गिरा) वाणी से (पुरः) आगे (गृणे) स्तुति करता हूँ (कविम्) पूर्ण विद्या से युक्त को जैसे वैसे (सुम्नैः) सुखों से हम लोग (ईमहे) याचना करें, वैसे आप लोग भी याचना करो ॥७॥
Essence
हे मनुष्यो ! आप लोग सत्य के प्रकाशक विद्वानों से विद्या की याचना करो तथा इस विद्या को प्राप्त होकर अन्यों को देओ ॥७॥
Subject
फिर मनुष्यों को क्या करना चाहिये, इस विषय को कहते हैं ॥

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