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Rigveda Mandal 6 / Sukta 15 / Mantra 13

75 Sukta
19 Mantra
6/15/13
Devata- अग्निः Rishi- भरद्वाजो बार्हस्पत्यः Chhanda- विराट्त्रिष्टुप् Swara- धैवतः
Mantra with Swara
अ॒ग्निर्होता॑ गृ॒हप॑तिः॒ स राजा॒ विश्वा॑ वेद॒ जनि॑मा जा॒तवे॑दाः। दे॒वाना॑मु॒त यो मर्त्या॑नां॒ यजि॑ष्ठः॒ स प्र य॑जतामृ॒तावा॑ ॥१३॥

अ॒ग्निः । होता॑ । गृ॒हऽप॑तिः । सः । राजा॑ । विश्वा॑ । वे॒द॒ । जनि॑म । जा॒तऽवे॑दाः । दे॒वाना॑म् । उ॒त । यः । मर्त्या॑नाम् । यजि॑ष्ठः । सः । प्र । य॒ज॒ता॒म् । ऋ॒तऽवा॑ ॥

Mantra without Swara
अग्निर्होता गृहपतिः स राजा विश्वा वेद जनिमा जातवेदाः। देवानामुत यो मर्त्यानां यजिष्ठः स प्र यजतामृतावा ॥

अग्निः। होता। गृहऽपतिः। सः। राजा। विश्वा। वेद। जनिम। जातऽवेदाः। देवानाम्। उत। यः। मर्त्यानाम्। यजिष्ठः। सः। प्र। यजताम्। ऋतऽवा ॥१३॥

Ashtak » 4 Adhyay » 5 Varga » 19 Mantra » 3

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1 Bhashyas
Meaning
हे विद्वानो ! (यः) जो (गृहपतिः) गृह का पालक जैसे वैसे ब्रह्माण्ड का प्रबन्ध करने (होता) धारण करने तथा (जातवेदाः) प्रकट हुए पदार्थों को जाननेवाला और सब का (राजा) न्याय करने तथा (ऋतावा) सत्य और असत्य का विभाग करने (यजिष्ठः) अतिशय यज्ञ करने वा पदार्थों का मेल करनेवाला (अग्निः) सब का प्रकाशक (देवानाम्) दिव्य पदार्थों वा विद्वानों के मध्य में (उत) (मर्त्यानाम्) मनुष्यों के (विश्वा) सम्पूर्ण (जनिमा) जन्मों को (वेद) जानता है (सः) वह हम लोगों को (प्र, यजताम्) अत्यन्त प्राप्त करावे (सः) वह हम लोगों का राजा होवे, ऐसा हम लोग निश्चय करते हैं, वैसे आप लोग भी जानो ॥१३॥
Essence
हे मनुष्यो ! जो सम्पूर्ण जगत् और जीवों के कर्म्मों को जानकर फलों को देता है, वही सत्य राजा है, ऐसा जानना चाहिये ॥१३॥
Subject
फिर उसी विषय को कहते हैं ॥