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Rigveda Mandal 6 / Sukta 1 / Mantra 5

75 Sukta
13 Mantra
6/1/5
Devata- अग्निः Rishi- भरद्वाजो बार्हस्पत्यः Chhanda- पङ्क्तिः Swara- पञ्चमः
Mantra with Swara
त्वां व॑र्धन्ति क्षि॒तयः॑ पृथि॒व्यां त्वां राय॑ उ॒भया॑सो॒ जना॑नाम्। त्वं त्रा॒ता त॑रणे॒ चेत्यो॑ भूः पि॒ता मा॒ता सद॒मिन्मानु॑षाणाम् ॥५॥

त्वाम् । व॒र्ध॒न्ति॒ । क्षि॒तयः॑ । पृ॒थि॒व्याम् । त्वाम् । रायः॑ । उ॒भया॑सः । जना॑नाम् । त्वम् । त्रा॒ता । त॒र॒णे॒ । चेत्यः॑ । भूः॒ । पि॒ता । मा॒ता । सद॑म् । इत् । मानु॑षाणाम् ॥

Mantra without Swara
त्वां वर्धन्ति क्षितयः पृथिव्यां त्वां राय उभयासो जनानाम्। त्वं त्राता तरणे चेत्यो भूः पिता माता सदमिन्मानुषाणाम् ॥

त्वाम्। वर्धन्ति। क्षितयः। पृथिव्याम्। त्वाम्। रायः। उभयासः। जनानाम्। त्वम्। त्राता। तरणे। चेत्यः। भूः। पिता। माता। सदम्। इत्। मानुषाणाम् ॥५॥

Ashtak » 4 Adhyay » 4 Varga » 35 Mantra » 5

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1 Bhashyas
Meaning
हे मनुष्यो ! (जनानाम्) मनुष्यों के (उभयासः) दोनों प्रकार के अर्थात् विद्वान् और अविद्वान् जन और (क्षितयः) निवासवाले मनुष्य (पृथिव्याम्) भूमि में (रायः) धनों की और (त्वाम्) आपकी (वर्धन्ति) वृद्धि करते हैं और (त्वाम्) उन आपको उत्तम प्रकार प्रयुक्त करते हैं (त्वम्) वह आप (तरणे) दुःखों से उद्धार के निमित्त (त्राता) रक्षा करनेवाले (चेत्यः) चयन समूहों में हुए (पिता) पिता के सदृश पालनकर्त्ता और (माता) माता के सदृश आदर करनेवाले (मानुषाणाम्) मनुष्यों के पालक (भूः) होओ और (सदम्) स्थिर होते हैं, जिसमें उस गृह को व्याप्त हुए उन आपको (इत्) ही सब लोग विशेष करके जानें ॥५॥
Essence
जो पृथिवी आदिकों में वर्त्तमान बिजुलीरूप अग्नि का उत्तम प्रकार प्रयोग करते हैं, वे सब के सुख देनेवाले होते हैं ॥५॥
Subject
फिर मनुष्यों को क्या प्रयोग करना चाहिये, इस विषय को कहते हैं ॥