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Rigveda Mandal 6 / Sukta 1 / Mantra 10

75 Sukta
13 Mantra
6/1/10
Devata- अग्निः Rishi- भरद्वाजो बार्हस्पत्यः Chhanda- त्रिष्टुप् Swara- धैवतः
Mantra with Swara
अ॒स्मा उ॑ ते॒ महि॑ म॒हे वि॑धेम॒ नमो॑भिरग्ने स॒मिधो॒त ह॒व्यैः। वेदी॑ सूनो सहसो गी॒र्भिरु॒क्थैरा ते॑ भ॒द्रायां॑ सुम॒तौ य॑तेम ॥१०॥

अ॒स्म्सि । ऊँ॒ इति॑ । ते॒ । महि॑ । म॒हे । वि॒धे॒म॒ । नमः॑ऽभिः । अ॒ग्ने॒ । स॒म्ऽइधा । उ॒त । ह॒व्यैः । वेदी॑ । सू॒नो॒ इति॑ । स॒ह॒सः॒ । गीः॒ऽभिः । उ॒क्थैः । आ । ते॒ । भ॒द्राया॑म् । सु॒ऽम॒तौ । या॒ते॒म॒ ॥

Mantra without Swara
अस्मा उ ते महि महे विधेम नमोभिरग्ने समिधोत हव्यैः। वेदी सूनो सहसो गीर्भिरुक्थैरा ते भद्रायां सुमतौ यतेम ॥

अस्मै। ऊँ इति। ते। महि। महे। विधेम। नमःऽभिः। अग्ने। सम्ऽइधा। उत। हव्यैः। वेदी। सूनो इति। सहसः। गीःऽभिः। उक्थैः। आ। ते। भद्रायाम्। सुऽमतौ। यतेम ॥१०॥

Ashtak » 4 Adhyay » 4 Varga » 36 Mantra » 5

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Meaning
हे (सहसः) बलवान् के (सूनो) पुत्र (अग्ने) विद्वज्जन ! जैसे (समिधा) ईंधन आदि के सदृश विद्या और (नमोभिः) अन्न आदिकों से संपूर्ण स्त्रियों को जो धारण करते हैं और जो आहुति को देखकर जानता है और जो (वेदी) जानते हैं सुखों को जिसमें वह होती है, उसका (गीर्भिः) वाणियों और (उक्थैः) कीर्त्तन करने योग्य वचनों से और (हव्यैः) भोजन करने योग्य पदार्थों से (अस्मै) इस (महे) बड़े (ते) आपके लिये (महि) बहुत (आ) सब प्रकार से (विधेम) सत्कार करें, उन वाणियों के सहित आप लोग (उ) भी (उत) और हम भी (ते) आपकी (भद्रायाम्) कल्याणकारिणी (सुमतौ) उत्तम बुद्धि में (यतेम) प्रयत्न करें ॥१०॥
Essence
हे मनुष्यो ! आप लोग इस प्राणियों के समुदाय के लिये सामग्री से यज्ञ करें ॥१०॥
Subject
जो पदार्थविद्याप्राप्ति के लिये प्रयत्न करते हैं, वे भाग्यशाली होते हैं, इस विषय को कहते हैं ॥

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