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Rigveda Mandal 5 / Sukta 83 / Mantra 1

87 Sukta
10 Mantra
5/83/1
Devata- सविता Rishi- श्यावाश्व आत्रेयः Chhanda- विराड्गायत्री Swara- षड्जः
Mantra with Swara
अच्छा॑ वद त॒वसं॑ गी॒र्भिरा॒भिः स्तु॒हि प॒र्जन्यं॒ नम॒सा वि॑वास। कनि॑क्रदद्वृष॒भो जी॒रदा॑नू॒ रेतो॑ दधा॒त्योष॑धीषु॒ गर्भ॑म् ॥१॥

अच्छ॑ । व॒द॒ । त॒वस॑म् । गीः॒ऽभिः । आ॒भिः । स्तु॒हि । प॒र्जन्य॑म् । नम॑सा । वि॒वा॒स॒ । कनि॑क्रदत् । वृ॒ष॒भः । जी॒रऽदा॑नुः । रेतः॑ । द॒धा॒ति॑ । ओष॑धीषु । गर्भ॑म् ॥

Mantra without Swara
अच्छा वद तवसं गीर्भिराभिः स्तुहि पर्जन्यं नमसा विवास। कनिक्रदद्वृषभो जीरदानू रेतो दधात्योषधीषु गर्भम् ॥

अच्छ। वद। तवसम्। गीःऽभिः। आभिः। स्तुहि। पर्जन्यम्। नमसा। आ। विवास। कनिक्रदत्। वृषभः। जीरऽदानुः। रेतः। दधाति। ओषधीषु। गर्भम् ॥१॥

Ashtak » 4 Adhyay » 4 Varga » 27 Mantra » 1

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Meaning
हे विद्वान् ! जो (वृषभः) थूहेवाले बैल के सदृश (जीरदानुः) जीवानेवाला (कनिक्रदत्) शब्द करता हुआ (नमसा) अन्न आदि के साथ (आ, विवास) सब ओर से बसता और (ओषधीषु) ओषधियों में (रेतः) जल रूप (गर्भम्) गर्भ को (दधाति) धारण करता है उस (पर्जन्यम्) मेघ को (आभिः) इन वर्त्तमान (गीर्भिः) वाणियों से (अच्छा) उत्तम प्रकार (वद) कहिये और (तवसम्) बल की (स्तुहि) प्रशंसा करिये ॥१॥
Essence
मनुष्यों को चाहिये कि विद्वानों से मेघविद्या का यथावत् विज्ञान करें ॥१॥
Subject
अब दश ऋचावाले तिरासीवें सूक्त का आरम्भ है, उसके प्रथम मन्त्र में मेघ कैसा है, इस विषय को कहते हैं ॥

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