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Rigveda Mandal 5 / Sukta 82 / Mantra 9

87 Sukta
9 Mantra
5/82/9
Devata- सविता Rishi- श्यावाश्व आत्रेयः Chhanda- गायत्री Swara- षड्जः
Mantra with Swara
य इ॒मा विश्वा॑ जा॒तान्या॑श्रा॒वय॑ति॒ श्लोके॑न। प्र च॑ सु॒वाति॑ सवि॒ता ॥९॥

यः । इ॒मा । विश्वा॑ । जा॒तानि॑ । आ॒ऽश्रा॒वय॑ति । श्लोके॑न । प्र । च॒ । सु॒वाति॑ । स॒वि॒ता ॥

Mantra without Swara
य इमा विश्वा जातान्याश्रावयति श्लोकेन। प्र च सुवाति सविता ॥

यः। इमा। विश्वा। जातानि। आऽश्रवयति। श्लोकेन। प्र। च। सुवाति। सविता ॥९॥

Ashtak » 4 Adhyay » 4 Varga » 26 Mantra » 4

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1 Bhashyas
Meaning
हे मनुष्यो ! (यः) जो (श्लोकेन) वाणी से (इमा) इन (विश्वा) सम्पूर्ण प्रज्ञानों और (जातानि) उत्पन्न हुओं को (आश्रावयति) सब प्रकार से सुनाता है वह (च) और (सविता) प्रेरणा करनेवाला हम लोगों को (प्र, सुवाति) प्रेरणा करे ॥९॥
Essence
हे मनुष्यो ! जो जगदीश्वर वेद के द्वारा मनुष्यों के लिये सम्पूर्ण विद्याओं का उपदेश करता है, वही परमगुरु मानने योग्य है ॥९॥ इस सूक्त में ईश्वर और विद्वानों के गुणों का वर्णन होने से इस सूक्त के अर्थ की इस से पूर्व सूक्त के अर्थ के साथ सङ्गति जाननी चाहिये ॥ यह बयासीवाँ सूक्त और छब्बीसवाँ वर्ग समाप्त हुआ ॥
Subject
मनुष्यों से कौन परम गुरु माना जाता है, इस विषय को कहते हैं ॥