Available Bhashyas

Bhashyas

Choose the bhashyas to show on this mantra page.

Rigveda Mandal 5 / Sukta 82 / Mantra 7

87 Sukta
9 Mantra
5/82/7
Devata- सविता Rishi- श्यावाश्व आत्रेयः Chhanda- गायत्री Swara- षड्जः
Mantra with Swara
आ वि॒श्वदे॑वं॒ सत्प॑तिं सू॒क्तैर॒द्या वृ॑णीमहे। स॒त्यस॑वं सवि॒तार॑म् ॥७॥

आ । वि॒श्वऽदे॑वम् । सत्ऽप॑तिम् । सु॒ऽउ॒क्तैः । अ॒द्य । वृ॒णी॒म॒हे॒ । स॒त्यऽस॑वम् । स॒वि॒तार॑म् ॥

Mantra without Swara
आ विश्वदेवं सत्पतिं सूक्तैरद्या वृणीमहे। सत्यसवं सवितारम् ॥

आ। विश्वऽदेवम्। सत्ऽपतिम्। सुऽउक्तैः। अद्य। वृणीमहे। सत्यऽसवम्। सवितारम् ॥७॥

Ashtak » 4 Adhyay » 4 Varga » 26 Mantra » 2

Available Bhashyas

1 Bhashyas
Meaning
हे मनुष्यो ! जैसे हम लोग (अद्या) आज (सूक्तैः) उत्तम प्रकार कहे गये सत्य वचनों वा वेदोक्त वचनों से (विश्वदेवम्) संसार के प्रकाश करने और (सत्पतिम्) प्रकृति आदि पदार्थ और सत्पुरुषों के पालन करनेवाले (सत्यसवम्) नहीं नाश होनेवाला सामर्थ्ययोग्य जिसका उस (सवितारम्) सम्पूर्ण पदार्थों के बनानेवाले परमात्मा का (आ, वृणीमहे) स्वीकार करते हैं, वैसे आप लोग भी स्वीकार कीजिये ॥७॥
Essence
इस मन्त्र में वाचकलुप्तोपमालङ्कार है । मनुष्यों को चाहिये कि परमेश्वर को छोड़कर किसी अन्य का आश्रय नहीं करें ॥७॥
Subject
फिर उसी विषय को अगले मन्त्र में कहते हैं ॥