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Rigveda Mandal 5 / Sukta 82 / Mantra 6

87 Sukta
9 Mantra
5/82/6
Devata- सविता Rishi- श्यावाश्व आत्रेयः Chhanda- निचृद्गायत्री Swara- षड्जः
Mantra with Swara
अना॑गसो॒ अदि॑तये दे॒वस्य॑ सवि॒तुः स॒वे। विश्वा॑ वा॒मानि॑ धीमहि ॥६॥

अना॑गसः । अदि॑तये । दे॒वस्य॑ । स॒वि॒तुः । स॒वे । विश्वा॑ । वा॒मानि॑ । धी॒म॒हि॒ ॥

Mantra without Swara
अनागसो अदितये देवस्य सवितुः सवे। विश्वा वामानि धीमहि ॥

अनागसः। अदितये। देवस्य। सवितुः। सवे। विश्वा। वामानि। धीमहि ॥६॥

Ashtak » 4 Adhyay » 4 Varga » 26 Mantra » 1

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1 Bhashyas
Meaning
हे मनुष्यो ! जैसे (अनागसः) अपराध से रहित हम लोग (अदितये) माता आदि के लिये (देवस्य) सर्व सुख देनेवाले (सवितुः) सम्पूर्ण ऐश्वर्य से युक्त परमात्मा के (सवे) जगद्रूप ऐश्वर्य्य में (विश्वा) सम्पूर्ण (वामानि) संभोग करने योग्य धनों को (धीमहि) धारण करें, वैसे आप लोग भी धारण करो ॥६॥
Essence
इस मन्त्र में वाचकलुप्तोपमालङ्कार है । जैसे विद्वान् जन इस ईश्वर से रचे हुए संसार में सृष्टिक्रम से विद्या के द्वारा कार्य्यों को सिद्ध करते हैं, वैसे ही अन्य जनों को भी चाहिये कि सिद्ध करें ॥६॥
Subject
इस जगत् में मनुष्यों को क्या करना चाहिये, इस विषय को कहते हैं ॥