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Rigveda Mandal 5 / Sukta 82 / Mantra 4

87 Sukta
9 Mantra
5/82/4
Devata- सविता Rishi- श्यावाश्व आत्रेयः Chhanda- निचृद्गायत्री Swara- षड्जः
Mantra with Swara
अ॒द्या नो॑ देव सवितः प्र॒जाव॑त्सावीः॒ सौभ॑गम्। परा॑ दुः॒ष्वप्न्यं॑ सुव ॥४॥

अ॒द्य । नः॒ । दे॒व॒ । स॒वि॒त॒रिति॑ । प्र॒जाऽव॑त् । सा॒वीः॒ । सौभ॑गम् । परा॑ । दुः॒ऽस्वप्न्य॑म् । सु॒व॒ ॥

Mantra without Swara
अद्या नो देव सवितः प्रजावत्सावीः सौभगम्। परा दुःष्वप्न्यं सुव ॥

अद्य। नः। देव। सवितरिति। प्रजाऽवत्। सावीः। सौभगम्। परा। दुःऽस्वप्न्यम्। सुव ॥४॥

Ashtak » 4 Adhyay » 4 Varga » 25 Mantra » 4

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1 Bhashyas
Meaning
हे (सवितः) सम्पूर्ण ऐश्वर्य्य के देनेवाले स्वामिन् (देव) शोभित ! आप कृपा से (नः) हम लोगों के लिये वा हम लोगों के (अद्या) आज (प्रजावत्) बहुत प्रजायें विद्यमान जिसके उस (सौभगम्) सुन्दर ऐश्वर्य के भाग को (सावीः) उत्पन्न कीजिये और (दुःष्वप्न्यम्) दुष्ट स्वप्नों में उत्पन्न दुःख को (परा, सुव) दूर कीजिये ॥४॥
Essence
जो परमेश्वर की प्रार्थना करके धर्म्मयुक्त पुरुषार्थ करते हैं, वे बहुत ऐश्वर्य्यवाले होकर दुःख और दारिद्र्य से रहित होते हैं ॥४॥
Subject
फिर उसी विषय को कहते हैं ॥