Available Bhashyas

Bhashyas

Choose the bhashyas to show on this mantra page.

Rigveda Mandal 5 / Sukta 81 / Mantra 3

87 Sukta
5 Mantra
5/81/3
Devata- सविता Rishi- श्यावाश्व आत्रेयः Chhanda- जगती Swara- निषादः
Mantra with Swara
यस्य॑ प्र॒याण॒मन्व॒न्य इद्य॒युर्दे॒वा दे॒वस्य॑ महि॒मान॒मोज॑सा। यः पार्थि॑वानि विम॒मे स एत॑शो॒ रजां॑सि दे॒वः स॑वि॒ता म॑हित्व॒ना ॥३॥

यस्य॑ । प्र॒ऽयाम॑म् । अनु॑ । अ॒न्ये । इत् । य॒युः । दे॒वाः । दे॒वस्य॑ । म॒हि॒मान॑म् । ओज॑सा । यः । पार्थि॑वानि । वि॒ऽम॒मे । सः । एत॑शः । रजां॑सि । दे॒वः । स॒वि॒ता । म॒हि॒ऽत्व॒ना ॥

Mantra without Swara
यस्य प्रयाणमन्वन्य इद्ययुर्देवा देवस्य महिमानमोजसा। यः पार्थिवानि विममे स एतशो रजांसि देवः सविता महित्वना ॥

यस्य। प्रऽयानम्। अनु। अन्ये। इत्। ययुः। देवाः। देवस्य। महिमानम्। ओजसा। यः। पार्थिवानि। विऽममे। सः। एतशः। रजांसि। देवः। सविता। महिऽत्वना ॥३॥

Ashtak » 4 Adhyay » 4 Varga » 24 Mantra » 3

Available Bhashyas

1 Bhashyas
Meaning
हे विद्वानो ! (यस्य) जिस जगदीश्वर (देवस्य) सब के प्रकाशक के (प्रयाणम्) अच्छी तरह चलते हैं, जिससे उस मार्ग और (महिमानम्) महिमा को (अनु) पश्चात् (अन्ये, इत्) और ही वसु आदि (देवाः) प्रकाश करनेवाले सूर्य्य आदि (ययुः) चलते अर्थात् प्राप्त होते हैं और (यः) जो (एतशः) सर्वत्र व्याप्त (सविता) सम्पूर्ण ऐश्वर्य्यों का करने और (देवः) सम्पूर्ण सुखों का देनेवाला (महित्वना) महिमा से (ओजसा) पराक्रम से और बल से (पार्थिवानि) अन्तरिक्ष में विदित कार्यों और (रजांसि) लोकों को (विममे) विशेष करके रचता है (सः) वही सब से ध्यान करने योग्य है ॥३॥
Essence
हे मनुष्यो ! जो सूर्य्य आदिकों के धारण करनेवालों का धारण करनेवाला और देनेवालों का देनेवाला, बड़ों और प्रकृतिरूप कारण से सम्पूर्ण जगत् को रचता है और जिसके पीछे अर्थात् आश्रय से सब जीवते और स्थित हैं, वही सम्पूर्ण जगत् का रचनेवाला ईश्वर ध्यान करने योग्य है ॥३॥
Subject
फिर ईश्वर कैसा है, इस विषय को कहते हैं ॥