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Rigveda Mandal 5 / Sukta 78 / Mantra 9

87 Sukta
9 Mantra
5/78/9
Devata- अश्विनौ Rishi- सप्तवध्रिरात्रेयः Chhanda- निचृदनुष्टुप् Swara- गान्धारः
Mantra with Swara
दश॒ मासा॑ञ्छशया॒नः कु॑मा॒रो अधि॑ मा॒तरि॑। नि॒रैतु॑ जी॒वो अक्ष॑तो जी॒वो जीव॑न्त्या॒ अधि॑ ॥९॥

दश॑ । मासा॑न् । श॒श॒या॒नः । कु॒मा॒रः । अधि॑ । मा॒तरि॑ । निः॒ऽऐतु॑ । जी॒वः । अक्ष॑तः । जी॒वः । जीव॑न्त्या । अधि॑ ॥

Mantra without Swara
दश मासाञ्छशयानः कुमारो अधि मातरि। निरैतु जीवो अक्षतो जीवो जीवन्त्या अधि ॥

दश। मासान्। शशयानः। कुमारः। अधि। मातरि। निःऐतु। जीवः। अक्षतः। जीवः। जीवन्त्याः। अधि ॥९॥

Ashtak » 4 Adhyay » 4 Varga » 20 Mantra » 5

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1 Bhashyas
Meaning
हे मनुष्यो ! जो (जीवः) प्राण आदि का धारण करनेवाला (अधि) ऊपर (मातरि) माता में (दश) दश (मासान्) महीनों तक (शशयानः) शयन करता हुआ (अक्षतः) घाव से रहित (कुमारः) बालक (निरैतु) निकले वह (जीवः) जीव (जीवन्त्याः) जीवती हुई के (अधि) ऊपर जीवता है ॥९॥
Essence
वे ही सन्तान उत्तम होते हैं कि जो दश महीने पूर्ण हों, जबतक तबतक गर्भ में स्थित होकर प्रकट होते हैं ॥९॥ इस सूक्त में अश्विपदवाच्य स्त्रीपुरुष के गुणों का वर्णन होने से इस सूक्त के अर्थ की इस से पिछले सूक्त के अर्थ के साथ सङ्गति जाननी चाहिये ॥ यह अठहत्तरवाँ सूक्त और बीसवाँ वर्ग समाप्त हुआ ॥
Subject
फिर उसी विषय को कहते हैं ॥