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Rigveda Mandal 5 / Sukta 78 / Mantra 3

87 Sukta
9 Mantra
5/78/3
Devata- अश्विनौ Rishi- सप्तवध्रिरात्रेयः Chhanda- उष्णिक् Swara- ऋषभः
Mantra with Swara
अश्वि॑ना वाजिनीवसू जु॒षेथां॑ य॒ज्ञमि॒ष्टये॑। हं॒सावि॑व पतत॒मा सु॒ताँ उप॑ ॥३॥

अश्वि॑ना । वा॒जि॒नी॒व॒सू॒ इति॑ वाजिनीऽवसू । जु॒षेथा॑म् । य॒ज्ञम् । इ॒ष्टये॑ । हं॒सौऽइ॑व । प॒त॒त॒म् । आ । सु॒तान् । उप॑ ॥

Mantra without Swara
अश्विना वाजिनीवसू जुषेथां यज्ञमिष्टये। हंसाविव पततमा सुताँ उप ॥

अश्विना। वाजिनीवसू इति वाजिनीऽवसू। जुषेथाम्। यज्ञम्। इष्टये। हंसौऽइव। पततम्। आ। सुतान्। उप ॥३॥

Ashtak » 4 Adhyay » 4 Varga » 19 Mantra » 3

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1 Bhashyas
Meaning
हे (वाजिनीवसू) विज्ञानक्रिया को वसानेवाले (अश्विना) अध्यापक और उपदेशक जनो ! आप लोग (इष्टये) इष्ट सुख की प्राप्ति के लिये (यज्ञम्) विज्ञान की सङ्गतिमय यज्ञ का (आ) सब प्रकार से (जुषेथाम्) सेवन करिये तथा (हंसाविव) दो हंसों के समान (सुतान्) पुत्र के सदृश वर्त्तमान शिक्षा करने योग्य शिष्यों के (उप) समीप (पततम्) प्राप्त हूजिये ॥३॥
Essence
इस मन्त्र में उपमालङ्कार है । उपदेशक जन सम्पूर्ण शिक्षा करने योग्य मनुष्यों को पुत्र के सदृश मान कर और सब जगह भ्रमण कर के सत्य उपदेश से कृतकृत्य करें ॥३॥
Subject
फिर उसी विषय को कहते हैं ॥