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Rigveda Mandal 5 / Sukta 78 / Mantra 2

87 Sukta
9 Mantra
5/78/2
Devata- अश्विनौ Rishi- अत्रिः Chhanda- त्रिष्टुप् Swara- धैवतः
Mantra with Swara
अश्वि॑ना हरि॒णावि॑व गौ॒रावि॒वानु॒ यव॑सम्। हं॒सावि॑व पतत॒मा सु॒ताँ उप॑ ॥२॥

अश्वि॑ना । ह॒रि॒णौऽइ॑व । गौ॒रौऽइ॑व । अनु॑ । यव॑सम् । हं॒सौऽइ॑व । प॒त॒त॒म् । आ । सु॒तान् । उप॑ ॥

Mantra without Swara
अश्विना हरिणाविव गौराविवानु यवसम्। हंसाविव पततमा सुताँ उप ॥

अश्विना। हरिणौऽइव। गौरौऽइव। अनु। यवसम्। हंसौऽइव। पततम्। आ। सुतान्। उप ॥२॥

Ashtak » 4 Adhyay » 4 Varga » 19 Mantra » 2

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1 Bhashyas
Meaning
हे (अश्विना) यजमान और यज्ञ करानेवाले आप दोनों (हंसाविव) दो हंसों के सदृश (सुतान्) उत्पन्न हुए ऐश्वर्य्य आदिकों के (उप) समीप (आ, पततम्) आइये तथा (यवसम्) सोमलता के (अनु) पश्चात् (हरिणाविव) जैसे हरिण दौड़ते हैं, वैसे और (गौराविव) जैसे दो मृग दौड़ते हैं, वैसे आइये ॥२॥
Essence
इस मन्त्र में उपमालङ्कार है । जो मनुष्य जल और बिजुली को सिद्ध करते हैं, वे हरिण के सदृश शीघ्र जाने के योग्य हैं ॥२॥
Subject
फिर उसी विषय को कहते हैं ॥