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Rigveda Mandal 5 / Sukta 76 / Mantra 3

87 Sukta
5 Mantra
5/76/3
Devata- अश्विनौ Rishi- अत्रिः Chhanda- स्वराट्पङ्क्ति Swara- पञ्चमः
Mantra with Swara
उ॒ता या॑तं संग॒वे प्रा॒तरह्नो॑ म॒ध्यंदि॑न॒ उदि॑ता॒ सूर्य॑स्य। दिवा॒ नक्त॒मव॑सा॒ शंत॑मेन॒ नेदानीं॑ पी॒तिर॒श्विना त॑तान ॥३॥

उ॒त । आ । या॒त॒म् । स॒म्ऽग॒वे । प्रा॒तः । अह्नः॑ । म॒ध्यन्दि॑ने । उत्ऽइ॑ता । सूर्य॑स्य । दिवा॑ । नक्त॑म् । अव॑सा । शम्ऽत॑मेन । न । इ॒दानी॑म् । पी॒तिः । अ॒श्विना॑ । आ । त॒ता॒न॒ ॥

Mantra without Swara
उता यातं संगवे प्रातरह्नो मध्यंदिन उदिता सूर्यस्य। दिवा नक्तमवसा शंतमेन नेदानीं पीतिरश्विना ततान ॥

उत। आ। यातम्। सम्ऽगवे। प्रातः। अह्नः। मध्यंदिने। उत्ऽइता। सूर्यस्य। दिवा। नक्तम्। अवसा। शम्ऽतमेन। न। इदानीम्। पीतिः। अश्विना। आ। ततान ॥३॥

Ashtak » 4 Adhyay » 4 Varga » 17 Mantra » 3

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1 Bhashyas
Meaning
हे (अश्विना) व्याप्तसुख स्त्रीपुरुषो ! तुम (अह्नः) दिवस के (मध्यन्दिने) मध्याह्न भाग में और (प्रातः) प्रभातसमय में (सूर्य्यस्य) सूर्यमण्डल के (उदिता) उदय होने में और दिन के (सङ्गवे) सायं समय में जिसमें गौएँ सङ्गत होतीं अर्थात् चर के आतीं (दिवा) दिन (नक्तम्) रात्रि (शन्तमेन) अत्यन्त सुख से (अवसा) रक्षा आदि के साथ (आ, यातम्) आओ (उत) और तुम दोनों की जो (पीतिः) पिआवट (आ, ततान) विस्तृत होती है उसको (इदानीम्) अब (न) नहीं नाश करो ॥३॥
Essence
किया विवाह जिन्होंने वे स्त्री-पुरुष प्रातः, मध्याह्न, सायं समयों में दिन-रात्रि को कल्याण करनेवाले कर्म्मों को सुखों से प्राप्त हों, कभी आलस्य मत करें ॥३॥
Subject
फिर उसी विषय को अगले मन्त्र में कहते हैं ॥