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Rigveda Mandal 5 / Sukta 75 / Mantra 9

87 Sukta
9 Mantra
5/75/9
Devata- अश्विनौ Rishi- अमहीयुः Chhanda- निचृत्पङ्क्ति Swara- पञ्चमः
Mantra with Swara
अभू॑दु॒षा रुश॑त्पशु॒राग्निर॑धाय्यृ॒त्वियः॑। अयो॑जि वां वृषण्वसू॒ रथो॑ दस्रा॒वम॑र्त्यो॒ माध्वी॒ मम॑ श्रुतं॒ हव॑म् ॥९॥

अभू॑त् । उ॒षा । रुश॑त्ऽपशुः । आ । अ॒ग्निः । अ॒धा॒यि॒ । ऋ॒त्वियः॑ । अयो॑जि । वा॒म् । वृ॒ष॒ण्व॒सू॒ इति॑ वृषण्ऽवसू । रथः॑ । द॒स्रौ॒ । अम॑र्त्यः । माध्वी॒ इति॑ । मम॑ । श्रुत॑म् । हव॑म् ॥

Mantra without Swara
अभूदुषा रुशत्पशुराग्निरधाय्यृत्वियः। अयोजि वां वृषण्वसू रथो दस्रावमर्त्यो माध्वी मम श्रुतं हवम् ॥

अभूत्। उषाः। रुशत्ऽपशुः। आ। अग्निः। अधायि। ऋत्वियः। अयोजि। वाम्। वृषण्वसू इति वृषण्ऽवसू। रथः। दस्रौ। अमर्त्यः। माध्वी इति। मम। श्रुतम्। हवम् ॥९॥

Ashtak » 4 Adhyay » 4 Varga » 16 Mantra » 4

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1 Bhashyas
Meaning
हे (वृषण्वसू) बलिष्ठ दो देहों को वसाने और (दस्रौ) दुःख के नाश करनेवाले (माध्वी) मधुर स्वभाववाले स्त्री-पुरुषो ! जिन (वाम्) आप दोनों को (रुशत्पशुः) पाला पशु जिसने वह (ऋत्वियः) ऋतु-ऋतु में यज्ञ करानेवाला (अग्निः) अग्नि (आ, अधायि) स्थापन किया जाता है और (उषाः) प्रातःकाल के सदृश (अभूत्) होवे और (अमर्त्यः) नहीं विद्यमान मनुष्य जिसमें ऐसा (रथः) वाहन (अयोजि) युक्त किया जाता वे आप दोनों (मम) मेरे (हवम्) आह्वान को (श्रुतम्) सुनिये और हे स्त्री के पति ! जो पत्नी प्रातःकाल के सदृश होवे, उसको निरन्तर प्रसन्न करो ॥९॥
Essence
सदा स्त्री-पुरुष ऋतुगामी होवें, सदा शरीर के आरोग्य और पुष्टि को करें तथा विद्या की उन्नति करके आनन्द की उन्नति करें ॥९॥ इस सूक्त में अश्विपदवाच्य विद्वान् स्त्री-पुरुष के गुण वर्णन करने से इस सूक्त के अर्थ की इस से पूर्व सूक्त के अर्थ के साथ सङ्गति जाननी चाहिये ॥ यह पचहत्तरवाँ सूक्त और सोलहवाँ वर्ग समाप्त हुआ ॥
Subject
फिर स्त्री-पुरुष कैसा वर्त्ताव करें, इस विषय को कहते हैं ॥