Available Bhashyas

Bhashyas

Choose the bhashyas to show on this mantra page.

Rigveda Mandal 5 / Sukta 75 / Mantra 3

87 Sukta
9 Mantra
5/75/3
Devata- अश्विनौ Rishi- अमहीयुः Chhanda- पङ्क्तिः Swara- पञ्चमः
Mantra with Swara
आ नो॒ रत्ना॑नि॒ बिभ्र॑ता॒वश्वि॑ना॒ गच्छ॑तं यु॒वम्। रुद्रा॒ हिर॑ण्यवर्तनी जुषा॒णा वा॑जिनीवसू॒ माध्वी॒ मम॑ श्रुतं॒ हव॑म् ॥३॥

आ । नः॒ । रत्ना॑नि । बिभ्र॑तौ । अश्वि॑ना । गच्छ॑तम् । यु॒वम् । रुद्रा॑ । हिर॑ण्यऽवर्तनी॒ इति॒ हिर॑ण्यऽवर्तनी । जु॒षा॒णा । वा॒जि॒नी॒व॒सू॒ इति॑ वाजिनीऽवसू । माध्वी॒ इति॑ । मम॑ । श्रुत॑म् । हव॑म् ॥

Mantra without Swara
आ नो रत्नानि बिभ्रतावश्विना गच्छतं युवम्। रुद्रा हिरण्यवर्तनी जुषाणा वाजिनीवसू माध्वी मम श्रुतं हवम् ॥

आ। नः। रत्नानि। बिभ्रतौ। अश्विना। गच्छतम्। युवम्। रुद्रा। हिरण्यवर्तनी इति हिरण्यऽवर्तनी। जुषाणा। वाजिनीवसू इति वाजिनीऽवसू। माध्वी इति। मम। श्रुतम्। हवम् ॥३॥

Ashtak » 4 Adhyay » 4 Varga » 15 Mantra » 3

Available Bhashyas

1 Bhashyas
Meaning
हे (वाजिनीवसू) अन्न आदि से युक्त सामग्री को वसाने और (हिरण्यवर्त्तनी) सुवर्ण वा ज्योति को वर्त्तानेवाले (रत्नानि) रमणीय धनों को (जुषाणा) सेवन और (बिभ्रतौ) धारण करते हुए (रुद्रा) दुष्टों को भय देनेवाले (अश्विना) विद्या से युक्त (माध्वी) मधुरस्वभाववालो ! (युवम्) आप दोनों (नः) हम लोगों को (आ) सब प्रकार से (गच्छतम्) प्राप्त होइये और (मम) मेरे (हवम्) आह्वान को (श्रुतम्) सुनिये ॥३॥
Essence
वे ही भाग्यशाली होवें, जो यथार्थवक्ता विद्वानों के समीप जाकर वा उनको बुलाकर प्रयत्न से विद्या का अभ्यास कर के परीक्षा देते हैं ॥३॥
Subject
फिर मनुष्यों को कैसे वर्त्तना चाहिये, इस विषय को कहते हैं ॥