Available Bhashyas

Bhashyas

Choose the bhashyas to show on this mantra page.

Rigveda Mandal 5 / Sukta 75 / Mantra 1

87 Sukta
9 Mantra
5/75/1
Devata- अश्विनौ Rishi- पौर आत्रेयः Chhanda- निच्रृदनुष्टुप् Swara- गान्धारः
Mantra with Swara
प्रति॑ प्रि॒यत॑मं॒ रथं॒ वृष॑णं वसु॒वाह॑नम्। स्तो॒ता वा॑मश्विना॒वृषिः॒ स्तोमे॑न॒ प्रति॑ भूषति॒ माध्वी॒ मम॑ श्रुतं॒ हव॑म् ॥१॥

प्रति॑ । प्रि॒यऽत॑मम् । रथ॑म् । वृष॑णम् । व॒सु॒ऽवाह॑नम् । स्तो॒ता । वा॒म् । अ॒श्वि॒नौ॒ । ऋषिः॑ । स्तोमे॑न । प्रति॑ । भू॒ष॒ति॒ । माध्वी॒ इति॑ । मम॑ । श्रुत॑म् । हव॑म् ॥

Mantra without Swara
प्रति प्रियतमं रथं वृषणं वसुवाहनम्। स्तोता वामश्विनावृषिः स्तोमेन प्रति भूषति माध्वी मम श्रुतं हवम् ॥

प्रति। प्रियऽतमम्। रथम्। वृषणम्। वसुऽवाहनम्। स्तोता। वाम्। अश्विनौ। ऋषिः। स्तोमेन। प्रति। भूषति। माध्वी इति। मम। श्रुतम्। हवम् ॥१॥

Ashtak » 4 Adhyay » 4 Varga » 15 Mantra » 1

Available Bhashyas

1 Bhashyas
Meaning
हे (माध्वी) मधुर आदि गुणों को प्राप्त करानेवाले (अश्विनौ) अध्यापक परीक्षक जनो ! जो (स्तोता) स्तुति करने और (ऋषिः) मन्त्र और अर्थ का जाननेवाला (स्तोमेन) स्तवन से (वाम्) आप दोनों के (प्रियतमम्) अत्यन्त प्रिय (वृषणम्) सुख के वर्षाने और (वसुवाहनम्) द्रव्यों के पहुँचानेवाले (रथम्) रमते हैं, जिससे उस विमान आदि वाहन को (प्रति, भूषति) शोभित करता है, उसके और (मम) मेरे (हवम्) बुलाने को (प्रति, श्रुतम्) सुनिये ॥१॥
Essence
जो अध्यापन और उपदेश करते हैं, वे योग्य समय में परीक्षा भी करें ॥१॥
Subject
अब नव ऋचावाले पचहत्तरवें सूक्त का प्रारम्भ है, उसके प्रथम मन्त्र में विद्वानों को क्या करना चाहिये, इस विषय को कहते हैं ॥