Available Bhashyas

Bhashyas

Choose the bhashyas to show on this mantra page.

Rigveda Mandal 5 / Sukta 74 / Mantra 7

87 Sukta
10 Mantra
5/74/7
Devata- अश्विनौ Rishi- पौर आत्रेयः Chhanda- निचृदनुष्टुप् Swara- गान्धारः
Mantra with Swara
को वा॑म॒द्य पु॑रू॒णामा व॑व्ने॒ मर्त्या॑नाम्। को विप्रो॑ विप्रवाहसा॒ को य॒ज्ञैर्वा॑जिनीवसू ॥७॥

कः । वा॒म् । अ॒द्य । पु॒रू॒णाम् । आ । व॒व्ने॒ । मर्त्या॑नाम् । कः । विप्रः॑ । वि॒प्र॒ऽवा॒ह॒सा॒ । कः । य॒ज्ञैः । वा॒जि॒नी॒व॒सू॒ इति॑ वाजिनीऽवसू ॥

Mantra without Swara
को वामद्य पुरूणामा वव्ने मर्त्यानाम्। को विप्रो विप्रवाहसा को यज्ञैर्वाजिनीवसू ॥

कः। वाम्। अद्य। पुरूणाम्। आ। वव्ने। मर्त्यानाम्। कः। विप्रः। विप्रऽवाहसा। कः। यज्ञैः। वाजिनीवसू इति वाजिनीऽवसू ॥७॥

Ashtak » 4 Adhyay » 4 Varga » 14 Mantra » 2

Bhashya

More bhashyas
Meaning
हे (विप्रवाहसा) विद्वानों से प्राप्त होने योग्य (वाजिनीवसू) धन धान्य प्राप्त करानेवालो ! (पुरूणाम्) बहुत (मर्त्यानाम्) मनुष्यों के मध्य में (कः) कौन (विप्रः) बुद्धिमान् (अद्य) आज (वाम्) आप दोनों का (आ, वव्ने) अच्छे प्रकार आदर करता (कः) कौन (यज्ञैः) यज्ञों से विद्या को और (कः) कौन बुद्धि का आदर करता है ॥७॥
Essence
जो विद्या की याचना करते हैं वे विद्वान् के समीप प्राप्त होकर प्रश्न और उत्तरों से आनन्द कर के लाभ को प्राप्त होवें, वे अन्यों को भी प्राप्त करा सकें ॥७॥
Subject
फिर मनुष्यों को क्या करना चाहिये, इस विषय को कहते हैं ॥

We are thankful to https://vedicscriptures.in for providing us a substantial amount of data for this section of the Vedas.