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Rigveda Mandal 5 / Sukta 74 / Mantra 2

87 Sukta
10 Mantra
5/74/2
Devata- अश्विनौ Rishi- पौर आत्रेयः Chhanda- विराडनुष्टुप् Swara- गान्धारः
Mantra with Swara
कुह॒ त्या कुह॒ नु श्रु॒ता दि॒वि दे॒वा नास॑त्या। कस्मि॒न्ना य॑तथो॒ जने॒ को वां॑ न॒दीनां॒ सचा॑ ॥२॥

कुह॑ । त्या । कुह॑ । नु । श्रु॒ता । दि॒वि । दे॒वा । नास॑त्या । कस्मि॑न् । आ । य॒त॒थः॒ । जने॑ । कः । वा॒म् । न॒दीना॑म् । सचा॑ ॥

Mantra without Swara
कुह त्या कुह नु श्रुता दिवि देवा नासत्या। कस्मिन्ना यतथो जने को वां नदीनां सचा ॥

कुह। त्या। कुह। नु। श्रुता। दिवि। देवा। नासत्या। कस्मिन्। आ। यतथः। जने। कः। वाम्। नदीनाम्। सचा ॥२॥

Ashtak » 4 Adhyay » 4 Varga » 13 Mantra » 2

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1 Bhashyas
Meaning
हे अध्यापक और उपदेशक जनो ! (त्या) ये (नासत्या) सत्यस्वरूप (कुह) कहाँ वर्त्तमान हैं और (कुह) कहाँ (श्रुता) सुने हुए (देवा) श्रेष्ठ गुणवाले होते हैं और तुम (कस्मिन्) किस (जने) जन में (आ, यतथः) सब ओर से यत्न करते हो (वाम्) उन आप दोनों की (नदीनाम्) नदियों के (सचा) सम्बन्ध से (कः) कौन (नु) शीघ्र है जो (दिवि) श्रेष्ठ व्यवहार वा प्रकाश में प्रयत्न करते हो ॥२॥
Essence
जिज्ञासु जनों को चाहिये कि विद्वानों के समीप जाकर बिजुली आदि की विद्याओं को पूछें ॥२॥
Subject
फिर मनुष्यों को विद्वानों के प्रति कैसे पूछना चाहिये, इस विषय को कहते हैं ॥