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Rigveda Mandal 5 / Sukta 73 / Mantra 9

87 Sukta
10 Mantra
5/73/9
Devata- अश्विनौ Rishi- पौर आत्रेयः Chhanda- निचृदनुष्टुप् Swara- गान्धारः
Mantra with Swara
स॒त्यमिद्वा उ॑ अश्विना यु॒वामा॑हुर्मयो॒भुवा॑। ता याम॑न्याम॒हूत॑मा॒ याम॒न्ना मृ॑ळ॒यत्त॑मा ॥९॥

स॒त्यम् । इत् । वै । ऊँ॒ इति॑ । अ॒श्वि॒ना॒ । यु॒वाम् । आ॒हुः॒ । म॒यः॒ऽभुवा॑ । ता । याम॑न् । या॒म॒ऽहूत॑मा । याम॑न् । आ । मृ॒ळ॒यत्ऽत॑मा ॥

Mantra without Swara
सत्यमिद्वा उ अश्विना युवामाहुर्मयोभुवा। ता यामन्यामहूतमा यामन्ना मृळयत्तमा ॥

सत्यम्। इत्। वै। ऊँ इति। अश्विना। युवाम्। आहुः। मयःऽभुवा। ता। यामन्। यामऽहूतमा। यामन्। आ। मृळयत्ऽतमा ॥९॥

Ashtak » 4 Adhyay » 4 Varga » 12 Mantra » 4

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1 Bhashyas
Meaning
हे (मयोभुवा) सुखकारक (अश्विना) अन्तरिक्ष और पृथिवी के सदृश अध्यापक और उपदेशक जनो ! जो (युवाम्) आप दोनों (यामहूतमा) प्रहरों को बुलानेवाले अत्यन्त (यामन्) प्रहर में (आ, मृळयत्तमा) सब ओर से अतीव सुखकारकों को (आहुः) कहते हैं (ता) वे दोनों (यामन्) प्रहर में (वै) निश्चय (सत्यम्) यथार्थ व्यवहार वा जल को (उ) तर्क के साथ (इत्) भी प्रचारित कीजिये ॥९॥
Essence
जैसे भूमि और मेघ सब प्राणियों के सुखकारक हैं, वैसे ही अध्यापक और उपदेशक जन अत्यन्त सुखकारक हों ॥९॥
Subject
फिर मनुष्यों को क्या करना चाहिये, इस विषय को कहते हैं ॥