Available Bhashyas

Bhashyas

Choose the bhashyas to show on this mantra page.

Rigveda Mandal 5 / Sukta 73 / Mantra 8

87 Sukta
10 Mantra
5/73/8
Devata- अश्विनौ Rishi- पौर आत्रेयः Chhanda- अनुष्टुप् Swara- गान्धारः
Mantra with Swara
मध्व॑ ऊ॒ षु म॑धूयुवा॒ रुद्रा॒ सिष॑क्ति पि॒प्युषी॑। यत्स॑मु॒द्राति॒ पर्ष॑थः प॒क्वाः पृक्षो॑ भरन्त वाम् ॥८॥

मध्वः॑ । ऊँ॒ इति॑ । सु । म॒धु॒ऽयु॒वा॒ । रुद्रा॑ । सिस॑क्ति । पि॒प्युषी॑ । यत् । स॒मु॒द्रा । अति॑ । पर्ष॑थः । प॒क्वाः । पृक्षः॑ । भ॒र॒न्त॒ । वा॒म् ॥

Mantra without Swara
मध्व ऊ षु मधूयुवा रुद्रा सिषक्ति पिप्युषी। यत्समुद्राति पर्षथः पक्वाः पृक्षो भरन्त वाम् ॥

मध्वः। ऊँ इति। सु। मधुऽयुवा। रुद्रा। सिसक्ति। पिप्युषी। यत्। समुद्रा। अति। पर्षथः। पक्वाः। पृक्षः। भरन्त। वाम् ॥८॥

Ashtak » 4 Adhyay » 4 Varga » 12 Mantra » 3

Bhashya

More bhashyas
Meaning
हे (मधूयुवा) सोम आदि रस को मिलाने और (रुद्रा) दुष्टों के रुलानेवाले जनो ! (यत्) जो (पिप्युषी) पान कराती हुई (मध्वः) सोमलता के रस को (उ) तर्क-वितर्क से (सु, सिषक्ति) अच्छे प्रकार सींचती है, उससे आप दोनों (समुद्रा) उत्तम प्रकार द्रवित होनेवालों को (अति, पर्षथः) सींचते हैं जिससे (पक्वाः) पके (पृक्षः) सम्बन्ध हुए फल (वाम्) आप दोनों का (भरन्त) पोषण करते हैं ॥८॥
Essence
हे मनुष्यो ! जैसे सूर्य्य और वायु वृष्टि से सब को सींचते और पके हुए फलों को उत्पन्न करते हैं, वैसे आप लोग भी आचरण करो ॥८॥
Subject
फिर मनुष्यों को क्या करना चाहिये, इस विषय को कहते हैं ॥

We are thankful to https://vedicscriptures.in for providing us a substantial amount of data for this section of the Vedas.