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Rigveda Mandal 5 / Sukta 71 / Mantra 2

87 Sukta
3 Mantra
5/71/2
Devata- मित्रावरुणौ Rishi- उरूचक्रिरात्रेयः Chhanda- गायत्री Swara- षड्जः
Mantra with Swara
विश्व॑स्य॒ हि प्र॑चेतसा॒ वरु॑ण॒ मित्र॒ राज॑थः। ई॒शा॒ना पि॑प्यतं॒ धियः॑ ॥२॥

विश्व॑स्य । हि । प्र॒ऽचे॒त॒सा॒ । वरु॑ण । मित्र॑ । राज॑थः । ई॒शा॒ना । पि॒प्य॒त॒म् । धियः॑ ॥

Mantra without Swara
विश्वस्य हि प्रचेतसा वरुण मित्र राजथः। ईशाना पिप्यतं धियः ॥

विश्वस्य। हि। प्रऽचेतसा। वरुण। मित्र। राजथः। ईशाना। पिप्यतम्। धियः ॥२॥

Ashtak » 4 Adhyay » 4 Varga » 9 Mantra » 2

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1 Bhashyas
Meaning
हे (प्रचेतसा) उत्तम ज्ञानवाले (ईशाना) समर्थ (वरुण) वर के देने और (मित्र) सब के सुख करनेवालो ! (विश्वस्य) संसार के मध्य में आप दोनों (राजथः) प्रकाशित होते हैं और (धियः) बुद्धियों को (हि) ही (पिप्यतम्) बढ़ाइये ॥२॥
Essence
हे मनुष्यो ! जैसे अन्तरिक्ष में सूर्य्य और चन्द्रमा प्रकाशित होते हैं, वैसे मनुष्यों की बुद्धियों को बढ़ाइये ॥२॥
Subject
फिर मनुष्यों को करना चाहिये, इस विषय को कहते हैं ॥