Available Bhashyas

Bhashyas

Choose the bhashyas to show on this mantra page.

Rigveda Mandal 5 / Sukta 70 / Mantra 2

87 Sukta
4 Mantra
5/70/2
Devata- मित्रावरुणौ Rishi- उरूचक्रिरात्रेयः Chhanda- विराट्त्रिष्टुप् Swara- धैवतः
Mantra with Swara
ता वां॑ स॒म्यग॑द्रुह्वा॒णेष॑मश्याम॒ धाय॑से। व॒यं ते रु॑द्रा स्याम ॥२॥

ता । वा॒म् । स॒म्यक् । अ॒द्रु॒ह्वा॒णा॒ । इष॑म् । अ॒श्या॒म॒ । धाय॑से । व॒यम् । ते । रु॒द्रा॒ । स्या॒म॒ ॥

Mantra without Swara
ता वां सम्यगद्रुह्वाणेषमश्याम धायसे। वयं ते रुद्रा स्याम ॥

ता। वाम्। सम्यक्। अद्रुह्वाणा। इषम्। अश्याम। धायसे। वयम्। ते। रुद्रा। स्याम ॥२॥

Ashtak » 4 Adhyay » 4 Varga » 8 Mantra » 2

Bhashya

More bhashyas
Meaning
हे (अद्रुह्वाणा) द्वेष से रहित (रुद्रा) रोदन से शब्द करानेवाले ! (वयम्) हम लोग (वाम्) आप दोनों के (धायसे) धारण करने को (इषम्) अन्न वा विज्ञान को (सम्यक्) उत्तम प्रकार (अश्याम) प्राप्त होवें (ते) वे हम लोग (ता) उन दोनों का सेवन करते हुए सब के धारण करने को (स्याम) होवें ॥२॥
Essence
वे ही अध्यापक और उपदेशक कृतक्रिय होवें, जो क्रोध और लोभ आदि दोषों से रहित होवें और जो उनसे पढ़ते हैं, वे विद्या के धारण में प्रयत्न करते हुए होवें ॥२॥
Subject
फिर उसी विषय को कहते हैं ॥

We are thankful to https://vedicscriptures.in for providing us a substantial amount of data for this section of the Vedas.