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Rigveda Mandal 5 / Sukta 7 / Mantra 8

87 Sukta
10 Mantra
5/7/8
Devata- अग्निः Rishi- इष आत्रेयः Chhanda- निचृदनुष्टुप् Swara- गान्धारः
Mantra with Swara
शुचिः॑ ष्म॒ यस्मा॑ अत्रि॒वत्प्र स्वधि॑तीव॒ रीय॑ते। सु॒षूर॑सूत मा॒ता क्रा॒णा यदा॑न॒शे भग॑म् ॥८॥

शुचिः॑ । स्म॒ । यस्मै॑ । अ॒त्रि॒ऽवत् । प्र । स्वधि॑तिःऽइव । रीय॑ते । सु॒ऽसूः । अ॒सू॒त॒ । मा॒ता । क्रा॒णा । यत् । आ॒न॒शे । भग॑म् ॥

Mantra without Swara
शुचिः ष्म यस्मा अत्रिवत्प्र स्वधितीव रीयते। सुषूरसूत माता क्राणा यदानशे भगम् ॥

शुचिः। स्म। यस्मै। अत्रिऽवत्। प्र। स्वधितिःऽइव। रीयते। सुऽसूः। असूत। माता। क्राणा। यत्। आनशे। भगम् ॥८॥

Ashtak » 3 Adhyay » 8 Varga » 25 Mantra » 3

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1 Bhashyas
Meaning
(यत्) जो (शुचिः) पवित्र (क्राणाः) करती हुई (माता) माता (यस्मै) जिसके लिये (स्वधितीव) वज्र के धारण करनेवाले के सदृश और (अत्रिवत्) अविद्यमान तीनवाले के सदृश (सुषूः) उत्तम प्रकार उत्पन्न करनेवाली (असूत) उत्पन्न करती और (प्र, रीयते) मिलती है (स्म) वही (भगम्) ऐश्वर्य्य को (आनशे) प्राप्त होती है ॥८॥
Essence
इस मन्त्र में उपमालङ्कार है । जो माता-पिता ब्रह्मचर्य्य किये हुए विधिपूर्वक सन्तानों को उत्पन्न करें तो सुख और ऐश्वर्य्य को प्राप्त होवें ॥८॥
Subject
अब राजशिक्षा विषय को कहते हैं ॥