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Rigveda Mandal 5 / Sukta 69 / Mantra 4

87 Sukta
4 Mantra
5/69/4
Devata- मित्रावरुणौ Rishi- उरूचक्रिरात्रेयः Chhanda- निचृत्त्रिष्टुप् Swara- धैवतः
Mantra with Swara
या ध॒र्तारा॒ रज॑सो रोच॒नस्यो॒तादि॒त्या दि॒व्या पार्थि॑वस्य। न वां॑ दे॒वा अ॒मृता॒ आ मि॑नन्ति व्र॒तानि॑ मित्रावरुणा ध्रु॒वाणि॑ ॥४॥

या । ध॒र्तारा॑ । रज॑सः । रो॒च॒नस्य॑ । उ॒त । आ॒दि॒त्या । दि॒व्या । पार्थि॑वस्य । न । वा॒म् । दे॒वाः । अ॒मृताः॑ । आ । मि॒न॒न्ति॒ । व्र॒तानि॑ । मि॒त्रा॒व॒रु॒णा॒ । ध्रु॒वाणि॑ ॥

Mantra without Swara
या धर्तारा रजसो रोचनस्योतादित्या दिव्या पार्थिवस्य। न वां देवा अमृता आ मिनन्ति व्रतानि मित्रावरुणा ध्रुवाणि ॥

या। धर्तारा। रजसः। रोचनस्य। उत। आदित्या। दिव्या। पार्थिवस्य। न। वाम्। देवाः। अमृताः। आ। मिनन्ति। व्रतानि। मित्रावरुणा। ध्रुवाणि ॥४॥

Ashtak » 4 Adhyay » 4 Varga » 7 Mantra » 4

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1 Bhashyas
Meaning
हे (मित्रावरुणा) प्राण और उदान वायु के समान वर्त्तमान अध्यापक और उपदेशक जनो ! जो (अमृता) प्राप्त हुआ जीवनमुक्तिसुख जिनको वे (देवाः) विद्वान् जन (वाम्) आप दोनों के (ध्रुवाणि) निश्चित (व्रतानि) कर्म्मों का (न) नहीं (आ) सब प्रकार से (मिनन्ति) नाश करते हैं और (या) जो (रोचनस्य) प्रकाशवाले (रजसः) लोक के (आदित्या) सूर्य्यों के (दिव्या) प्रकाशमानों के (उत) और (पार्थिवस्य) पृथिवी में विदित लोक के (धर्त्तारा) धारण करनेवाले वर्त्तमान हैं, उनको जानिये ॥४॥
Essence
हे मनुष्यो ! जो वायु बिजुली और सूर्य्य सम्पूर्ण लोक के धारण करनेवाले हैं, वे परमेश्वर से धारण किये गये हैं, ऐसा जानकर सम्पूर्ण ईश्वर ने ही धारण किया, ऐसा जानना चाहिये ॥४॥ इस सूक्त में प्राण उदान और बिजुली के गुण वर्णन करने से इस सूक्त के अर्थ की इस से पूर्व सूक्त के अर्थ के साथ सङ्गति जाननी चाहिये ॥ यह उनहत्तरवाँ सूक्त और सप्तम वर्ग समाप्त हुआ ॥
Subject
मनुष्यों को क्या क्या जानना चाहिये, इस विषय को कहते हैं ॥