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Rigveda Mandal 5 / Sukta 66 / Mantra 4

87 Sukta
6 Mantra
5/66/4
Devata- मित्रावरुणौ Rishi- रातहव्य आत्रेयः Chhanda- निचृदनुष्टुप् Swara- गान्धारः
Mantra with Swara
अधा॒ हि काव्या॑ यु॒वं दक्ष॑स्य पू॒र्भिर॑द्भुता। नि के॒तुना॒ जना॑नां चि॒केथे॑ पूतदक्षसा ॥४॥

अध॑ । हि । काव्या॑ । यु॒वम् । दक्ष॑स्य । पूः॒ऽभिः । अ॒द्भु॒ता॒ । नि । के॒तुना॑ । जना॑नाम् । चि॒केथे॒ इति॑ । पू॒त॒ऽद॒क्ष॒सा॒ ॥

Mantra without Swara
अधा हि काव्या युवं दक्षस्य पूर्भिरद्भुता। नि केतुना जनानां चिकेथे पूतदक्षसा ॥

अध। हि। काव्या। युवम्। दक्षस्य। पूःऽभिः। अद्भुता। नि। केतुना। जनानाम्। चिकेथे इति। पूतऽदक्षसा ॥४॥

Ashtak » 4 Adhyay » 4 Varga » 4 Mantra » 4

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1 Bhashyas
Meaning
हे अध्यापक और उपदेशक जनो ! (पूतदक्षसा) पवित्र बल जिनका ऐसे (युवम्) आप दोनों (केतुना) बुद्धि से (अद्भुता) आश्चर्य्यरूप (काव्या) कवियों के कर्म्मों को (चिकेथे) जानते हैं (अधा) इसके अनन्तर (हि) जिससे (जनानाम्) मनुष्यों के (दक्षस्य) बलसम्बन्धी (पूर्भिः) नगरों से (नि) निरन्तर करके जानते हैं, उनका हम लोग सदा सत्कार करें ॥४॥
Essence
विद्वानों को यह योग्य है कि स्वयं पूर्ण विद्वान् होके अज्ञजनों को अध्यापन और उपदेश से उपकृत करें ॥४॥
Subject
फिर उसी विषय को कहते हैं ॥