Available Bhashyas

Bhashyas

Choose the bhashyas to show on this mantra page.

Rigveda Mandal 5 / Sukta 66 / Mantra 1

87 Sukta
6 Mantra
5/66/1
Devata- मित्रावरुणौ Rishi- रातहव्य आत्रेयः Chhanda- भुरिगुष्णिक् Swara- ऋषभः
Mantra with Swara
आ चि॑कितान सु॒क्रतू॑ दे॒वौ म॑र्त रि॒शाद॑सा। वरु॑णाय ऋ॒तपे॑शसे दधी॒त प्रय॑से म॒हे ॥१॥

आ । चि॒कि॒ता॒न॒ । सु॒क्रतू॒ इति॑ सु॒ऽक्रतू॑ । दे॒वौ । म॒र्त॒ । रि॒शाद॑सा । वरु॑णाय । ऋ॒तऽपे॑शसे । द॒धी॒त । प्रय॑से म॒हे ॥

Mantra without Swara
आ चिकितान सुक्रतू देवौ मर्त रिशादसा। वरुणाय ऋतपेशसे दधीत प्रयसे महे ॥

आ। चिकितान। सुक्रतू इति सुऽक्रतू। देवौ। मर्त। रिशादसा। वरुणाय। ऋतऽपेशसे। दधीत। प्रयसे। महे ॥१॥

Ashtak » 4 Adhyay » 4 Varga » 4 Mantra » 1

Available Bhashyas

1 Bhashyas
Meaning
हे (चिकितान, मर्त्त) ज्ञान और मरण धर्मयुक्त ! आप (ऋतपेशसे) सत्यस्वरूप और (प्रयसे) प्रयत्न करते हुए (महे) बड़े (वरुणाय) उत्तम व्यवहारयुक्त के लिये (रिशादसा) दुष्टों के मारनेवाले (सुक्रतू) उत्तम बुद्धिमान् (देवौ) दो विद्वानों को (आ) सब प्रकार से (दधीत) धारण करिये ॥१॥
Essence
वही विद्वान् होता है, जो विद्वानों का सङ्ग करके बुद्धि को बढ़ाता है ॥१॥
Subject
अब छः ऋचावाले छासठवें सूक्त का आरम्भ है, उसके प्रथम मन्त्र मे मनुष्य क्या करें, इस विषय को कहते हैं ॥