Available Bhashyas

Bhashyas

Choose the bhashyas to show on this mantra page.

Rigveda Mandal 5 / Sukta 62 / Mantra 6

87 Sukta
9 Mantra
5/62/6
Devata- मित्रावरुणौ Rishi- श्रुतिविदात्रेयः Chhanda- निचृत्त्रिष्टुप् Swara- धैवतः
Mantra with Swara
अक्र॑विहस्ता सु॒कृते॑ पर॒स्पा यं त्रासा॑थे वरु॒णेळा॑स्व॒न्तः। राजा॑ना क्ष॒त्रमहृ॑णीयमाना स॒हस्र॑स्थूणं बिभृथः स॒ह द्वौ ॥६॥

अक्र॑विऽहस्ता । सु॒ऽकृते॑ । प॒रः॒ऽपा । यम् । त्रासा॑थे । व॒रु॒णा॒ । इला॑सु । अ॒न्तरिति॑ । राजा॑ना । क्ष॒त्रम् । अहृ॑णीयमाना । स॒हस्र॑ऽस्थूणम् । बि॒भृ॒थः॒ । स॒ह । द्वौ ॥

Mantra without Swara
अक्रविहस्ता सुकृते परस्पा यं त्रासाथे वरुणेळास्वन्तः। राजाना क्षत्रमहृणीयमाना सहस्रस्थूणं बिभृथः सह द्वौ ॥

अक्रविऽहस्ता। सुऽकृते। परःऽपा। यम्। त्रासाथे इति। वरुणा। इळासु। अन्तरिति अन्तः। राजाना। क्षत्रम्। अहृणीयमाना। सहस्रऽस्थूणम्। बिभृथः। सह। द्वौ ॥६॥

Ashtak » 4 Adhyay » 3 Varga » 31 Mantra » 1

Available Bhashyas

1 Bhashyas
Meaning
हे (वरुणा) अति श्रेष्ठ सभा और सेना के स्वामी राजा और मन्त्री जनो ! वायु और सूर्य के सदृश (अक्रविहस्ता) नहीं हिंसा करनेवाले हस्त जिनके वा दानशील हस्त जिनके वे (परस्पा) दूसरों की रक्षा करनेवाले (राजाना) प्रकाशमान और (क्षत्रम्) राज्य वा धन को (अहृणीयमाना) क्रोध से रहित आचरण करते हुए (द्वौ) दोनों आप (इळासु) पृथिवियों के (अन्तः) मध्य में (सुकृते) धर्मयुक्त काम में वर्त्तमान (सह) साथ (यम्) जिसको (त्रासाथे) भय देवें उस (सहस्रस्थूणम्) सहस्र वा असंख्य थूनीवाले जगत्, राज्य वा वाहन को (बिभृथः) धारण करो ॥६॥
Essence
इस मन्त्र में वाचकलुप्तोपमालङ्कार है। हे राजा और मन्त्रीजन ! आप स्वयं धर्मात्मा होकर सहस्र शाखा जिसकी, ऐसे राज्य के रक्षण के लिये दुष्टों को दण्ड देकर और श्रेष्ठों का सत्कार करके यशस्वी होवें ॥६॥
Subject
फिर उसी विषय को कहते हैं ॥