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Rigveda Mandal 5 / Sukta 61 / Mantra 9

87 Sukta
19 Mantra
5/61/9
Devata- शशीयशी Rishi- श्यावाश्व आत्रेयः Chhanda- गायत्री Swara- षड्जः
Mantra with Swara
उ॒त मे॑ऽरपद्युव॒तिर्म॑म॒न्दुषी॒ प्रति॑ श्या॒वाय॑ वर्त॒निम्। वि रोहि॑ता पुरुमी॒ळ्हाय॑ येमतु॒र्विप्रा॑य दी॒र्घय॑शसे ॥९॥

उ॒त । मे॒ । अ॒र॒प॒त् । यु॒व॒तिः । म॒म॒न्दुषी॑ । प्रति॑ । श्या॒वाय॑ । व॒र्त॒निम् । वि । रोहि॑ता । पु॒रु॒ऽमी॒ळ्हाय॑ । ये॒म॒तुः॒ । विप्रा॑य । दी॒र्घऽय॑शसे ॥

Mantra without Swara
उत मेऽरपद्युवतिर्ममन्दुषी प्रति श्यावाय वर्तनिम्। वि रोहिता पुरुमीळ्हाय येमतुर्विप्राय दीर्घयशसे ॥

उत। मे। अरपत्। युवतिः। ममन्दुषी। प्रति। श्यावाय। वर्तनिम्। वि। रोहिता। पुरुऽमीळ्हाय। येमतुः। विप्राय। दीर्घऽयशसे ॥९॥

Ashtak » 4 Adhyay » 3 Varga » 27 Mantra » 4

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1 Bhashyas
Meaning
जो (प्रति, श्यावाय) धूमिल वर्ण से युक्त अश्व और (पुरुमीळ्हाय) बहुत वीर्य्य के सींचनेवाले (दीर्घयशसे) बड़े यशस्वी (विप्राय) बुद्धिमान् (मे) मेरे लिये (ममन्दुषी) प्रशंसा करने योग्य और आनन्द करनेवाली (वर्त्तनिम्) मार्ग को (वि, रोहिता) जानेवाली (युवतिः) यौवनावस्था को प्राप्त स्त्री (अरपत्) स्पष्ट उपदेश देती है (उत) और मैं स्पष्ट उपदेश करूँ, वे हम दोनों जैसे श्रेष्ठ गुणों से युक्त स्त्री और पुरुष (येमतुः) नियम करते हैं, वैसे वर्त्ताव करें ॥९॥
Essence
जो स्त्री-पुरुष परस्पर तुल्य गुण, कर्म और स्वभाववाले हों तो श्रेष्ठ मार्ग, अत्यन्त कीर्त्ति और आनन्द को प्राप्त हों ॥९॥
Subject
फिर स्त्री-पुरुष के विषय को कहते हैं ॥