Available Bhashyas

Bhashyas

Choose the bhashyas to show on this mantra page.

Rigveda Mandal 5 / Sukta 61 / Mantra 7

87 Sukta
19 Mantra
5/61/7
Devata- शशीयशी Rishi- श्यावाश्व आत्रेयः Chhanda- अनुष्टुप् Swara- गान्धारः
Mantra with Swara
वि या जा॒नाति॒ जसु॑रिं॒ वि तृष्य॑न्तं॒ वि का॒मिन॑म्। दे॒व॒त्रा कृ॑णु॒ते मनः॑ ॥७॥

वि । या । जा॒नाति॑ । जसु॑रिम् । वि । तृष्य॑न्तम् । वि । का॒मिन॑म् । दे॒व॒ऽत्रा । कृ॒णु॒ते । मनः॑ ॥

Mantra without Swara
वि या जानाति जसुरिं वि तृष्यन्तं वि कामिनम्। देवत्रा कृणुते मनः ॥

वि। या। जानाति। जसुरिम्। वि। तृष्यन्तम्। वि। कामिनम्। देवऽत्रा। कृणुते। मनः ॥७॥

Ashtak » 4 Adhyay » 3 Varga » 27 Mantra » 2

Available Bhashyas

1 Bhashyas
Meaning
हे मनुष्यो ! (या) जो (जसुरिम्) प्रयत्न करते हुए को (वि) विशेष करके (जानाति) जानती है (तृष्यन्तम्) पिपासा से व्याकुल हुए के तुल्य को (वि) विशेष करके जानती है और (कामिनम्) कामातुर पुरुष को (वि) विशेष करके जानती है वह (देवत्रा) विद्वानों में (मनः) चित्त (कृणुते) करती है ॥७॥
Essence
जो स्त्री पुरुषार्थी, धार्मिक, लोभी और कामातुर पति को जानकर दोषों के निवारण और गुणों के ग्रहण करने के लिये प्रेरणा करती है, वही पति आदि की कल्याण करनेवाली होती है ॥७॥
Subject
फिर उसी विषय को कहते हैं ॥