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Rigveda Mandal 5 / Sukta 61 / Mantra 6

87 Sukta
19 Mantra
5/61/6
Devata- मरुतः Rishi- श्यावाश्व आत्रेयः Chhanda- गायत्री Swara- षड्जः
Mantra with Swara
उ॒त त्वा॒ स्त्री शशी॑यसी पुं॒सो भ॑वति॒ वस्य॑सी। अदे॑वत्रादरा॒धसः॑ ॥६॥

उ॒त । त्वा॒ । स्त्री । शशी॑यसी । पुं॒सः । भ॒व॒ति॒ । वस्य॑सी । अदे॑वऽत्रात् । अ॒रा॒धसः॑ ॥

Mantra without Swara
उत त्वा स्त्री शशीयसी पुंसो भवति वस्यसी। अदेवत्रादराधसः ॥

उत। त्वा। स्त्री। शशीयसी। पुंसः। भवति। वस्यसी। अदेवऽत्रात्। अराधसः ॥६॥

Ashtak » 4 Adhyay » 3 Varga » 27 Mantra » 1

Bhashya

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Meaning
हे पुरुष ! जो (स्त्री) स्त्री (अदेवत्रात्) विद्वानों की रक्षा करता है जिससे उससे विरुद्ध (अराधसः) धनविरुद्ध पदार्थ से पृथक् होकर (पुंसः) पुरुष की (वस्यसी) अत्यन्त धनवाली (उत) और (शशीयसी) अत्यन्त दुःख को दूर करनेवाली (भवति) होती और (त्वा) आपको सुखी करती है, उसको आप सुखयुक्त करो ॥६॥
Essence
वही स्त्री पति से आदर करने योग्य होती है जो अन्यायाचरण और नहीं आदर करने योग्य के आदर करने से रहित हुई पति को सुखी करती है, वही पति से निरन्तर आदर करने योग्य होती है ॥६॥
Subject
फिर स्त्री के पुरुषार्थ उपदेश को कहते हैं ॥

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